ताज़ा खबर
 

गेस्ट हाउस कांड : जिसने माया-मुलायम को बनाया दुश्मन, 23 साल बाद फिर एक मंच पर आए दोनों दल

UP की राजनीति में साल 1995 और गेस्ट हाउस कांड दोनों काफी अहम हैं। इसी साल के जून महीने में दो तारीख को ऐसा कुछ हुआ, जिसने भारतीय राजनीति का बदरंग चेहरा दिखाया। यह रिपोर्ट उस गेस्ट हाउस कांड की, जिसने मायावती और मुलायम सिंह के बीच गहरी खाई खींच दी।

Author January 12, 2019 11:57 AM
अखिलेश यादव और मायावत, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

UP की राजनीति में साल 1995 और गेस्ट हाउस कांड दोनों काफी अहम हैं। इसी साल के जून महीने में दो तारीख को ऐसा कुछ हुआ, जिसने भारतीय राजनीति का बदरंग चेहरा दिखाया। आज शनिवार (12 जनवरी, 2019) को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, लेकिन इससे पहले जिक्र उस गेस्ट हाउस कांड का, जिसने मायावती और मुलायम सिंह के बीच गहरी खाई खींच दी।

तब भी बीजेपी का रास्ता रोकने से हुई थी शुरुआत : बात शुरू होती है 1993 के विधानसभा चुनाव से। अयोध्या में बाबरी विध्वंस हो चुका था, जिसके बाद बीजेपी का रास्ता रोकने के लिए 1992 में ही बनी नई पार्टी सपा और बसपा ने गठबंधन कर लिया। उस वक्त सपा ने 256 सीटों पर चुनाव लड़ा तो बीएसपी ने 164 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। 177 सीट जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन 109 सीटें जीतने वाली सपा और 67 सीटें जीतने वाली बीएसपी ने गठबंधन सरकार बना ली।

सत्ता के लालच से निकला गेस्ट हाउस कांड : साल 1995 आ चुका था। यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन वाली सरकार थी, लेकिन मायावती सरकार में शामिल नहीं हुई थीं। उन्होंने बाहर से ही मुलायम सरकार को समर्थन दे रखा था। धीरे-धीरे कुछ फैसलों को लेकर दोनों दिग्गज नेताओं में तनातनी बढ़ने लगी थी। इसी साल गर्मियों में खबर फैली कि मायावती और बीजेपी में तालमेल होने वाला है। दरअसल, उस वक्त दिल्ली में फिक्र होने लगी कि अगर यूपी में गठबंधन वाली यह सरकार टिक गई तो भविष्य में काफी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे में मायावती से कहा गया कि अगर वे बीजेपी से गठबंधन कर लें तो मुख्यमंत्री बन सकती हैं। इसके बाद मायावती ने समर्थन वापस लेने का अपना फैसला मुलायम को सुना दिया।

2 जून 1995 को हुआ था गेस्ट हाउस कांड : मुलायम को फैसला सुनाने के बाद मायावती ने लखनऊ स्थित गेस्ट हाउस में 2 जून 1995 को अपने विधायकों की बैठक बुलाई। इस बीच सपा के लोगों को खबर मिली कि बीएसपी और बीजेपी की सांठ-गांठ हो रही है, जिसके बाद हजारों सपा कार्यकर्ता गेस्ट हाउस के बाहर जुट गए और वहां मौजूद बीएसपी कार्यकर्ताओं को पीटने लगे। ऐसे में मायावती एक कमरे में छिप गईं और उसे अंदर से बंद कर लिया गया। बीएसपी के नेताओं ने प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को फोन मिलाया, लेकिन किसी से बात नहीं हो सकी। लोगों ने उस कमरे का दरवाजा भी तोड़ने की कोशिश की थी, जिसमें मायावती बंद थीं, लेकिन सफल नहीं हो सके। हालांकि, कुछ लोग कहते हैं कि सपा कार्यकर्ताओं ने मायावती के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता भी की थी।

मायावती ने लगाया था हत्या की कोशिश का आरोप : 3 जून 1995 को मायावती ने समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद मुलायम सरकार गिर गई। इस दौरान मायावती ने आरोप लगाया कि सपा ने उन्हें गेस्ट हाउस में मरवाने की साजिश रची थी, जिससे बीएसपी को खत्म किया जा सके। इसके बाद मायावती को सपा से नफरत हो गई थी। 1996 में यूपी में एक बार फिर विधानसभा चुनाव हुए। नतीजा काफी हद तक 1993 जैसा ही था। बीजेपी ने 174 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीएसपी को 67 सीटें मिलीं। वहीं, समाजवादी पार्टी के पक्ष में 110 सीटें गई थीं। इन चुनावों में नतीजों के बाद बीएसपी को बीजेपी का साथ मिला और मायावती पहली बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बन गईं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App