ताज़ा खबर
 

मैक्स अस्पताल का रद्द लाइसेंस किया बहाल

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल ने बुधवार से सामान्य कामकाज शुरू कर दिया।

Author नई दिल्ली | December 21, 2017 12:20 AM

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल ने बुधवार से सामान्य कामकाज शुरू कर दिया। दिल्ली के वित्त आयुक्त की अदालत ने मंगलवार को दिल्ली सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें इस अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। रद्द लाइसेंस को बहाल किए जाने के बाद दिल्ली की सियासत गरमा गई है। आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर उपराज्यपाल के माध्यम से अस्पताल का लाइसेंस बहाल कराने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा ने दिल्ली सरकार पर मोटी डील करने के बाद अस्पताल के रद्द लाइसेंस को बहाल करवाने का इल्जाम लगाया। राजनिवास ने भी इस मामले में अपनी सफाई दी कि इस पूरे प्रकरण से उपराज्यपाल अनिल बैजल का कोई लेना-देना नहीं है।

आपको बता दें कि जीवित नवजात को मृत घोषित किए जाने पर मचे हंगामे के बाद सूबे की अरविंद केजरीवाल सरकार ने तीन डॉक्टरों की टीम द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर बीते 8 दिसंबर को इस अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया था। बीते 15 दिसंबर को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार और मैक्स प्रशासन के बीच पर्दे के पीछे सांठगांठ चल रही है और जल्दी ही मैक्स का लाइसेंस बहाल किए जाने की संभावना है। उन्होंने सरकार को चेताया था कि किसी भी सूरत में अस्पताल का लाइसेंस बहाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बुधवार को फिर कहा कि अब मुख्यमंत्री केजरीवाल को बताना चाहिए कि अस्पताल प्रबंधन के साथ उनकी क्या मोटी डील हुई है। मैक्स अस्पताल ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि सक्षम प्राधिकार द्वारा दिल्ली सरकार के लाइसेंस रद्द करने संबंधी आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद अस्पताल में सामान्य रूप से कामकाज शुरू हो गया है।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता व पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिस तरह से मैक्स अस्पताल को लेकर दिल्ली सरकार के फैसले कोे पलटा गया है, उससे जाहिर है कि भाजपा के लोग पर्दे के पीछे बैठकर उपराज्यपाल के माध्यम से इन स्वास्थ्य माफियाओं को बचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस कथित निष्पक्ष अफसर ने मैक्स शालीमार बाग को राहत दी है, दरअसल उसकी नियुक्ति उपराज्यपाल ही करते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि मैक्स शालीमार बाग को राहत देने में भाजपा और उसकी अगुआई वाली केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल की प्रमुख भूमिका है।

उपराज्यपाल पर आरोप लगता देख राजनिवास भी हरकत में आ गया। उसने बयान जारी कर कहा कि मैक्स हेल्थ केयर इंस्टिट्यूट ने स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, दिल्ली सरकार द्वारा उसका लाइसेंस रद्द करने के आदेश के खिलाफ दिल्ली नर्सिंग होम्स पंजीकरण अधिनियम 1953 की धारा 8(3) के तहत वित्तीय आयुक्त के समक्ष अपील की थी। बयान में कहा गया है कि यह ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली नर्सिंग होम्स रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1953 के साथ-साथ विभिन्न अधिनियमों के तहत दिल्ली विधानसभा अधिनियम नामित दिल्ली (डेलिगेशन आफ पावर) (संशोधित) अधिनिमय, 1994 द्वारा अपीलीय प्राधिकारी की शक्तियां वित्तीय आयुक्त, दिल्ली को दी गई हैं। अपीलीय प्राधिकारी की शक्तियां अर्धन्यायिक कार्य होने के कारण वित्तीय आयुक्त, दिल्ली द्वारा लिए गए फैसले में किसी भी प्राधिकारी का हस्तक्षेप नहीं होता है। राजनिवास ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि निहित स्वार्थों द्वारा यह गलत सूचना प्रसारित की गई है क्योंकि उपराज्यपाल कार्यालय उक्त मामले में किसी भी स्तर पर शामिल नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App