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बंगाल की गरमागरम राजनीति के बीच ‘भाईजान’ की एंट्री, दूसरी सबसे बड़ी सूफी मजार के मौलाना बनाएंगे अपनी पार्टी

सिद्दीकी के मुताबिक, उनका गठबंधन 10 पार्टियों के साथ होगा और वे 60 से 80 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। सिद्दीकी की मानें तो उनके गठबंधन में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी शामिल हो सकती है

West Bengal, Furfura Sharifफुरफुरा शरीफ स्थित अपने घर में पीरजादा सिद्दीकी। (एक्सप्रेस फोटो- रविक भट्टाचार्य)

पश्चिम बंगाल में चुनाव में अब सिर्फ कुछ महीनों का समय ही रह गया है। जहां ज्यादातर विश्लेषक इन चुनावों को तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधे मुकाबले के तौर पर देख रहे हैं, वहीं अन्य दलों के बीच बनते गठबंधन भी राज्य में लोगों की नजर में आने लगे हैं। इनमें सबसे प्रमुख कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों का गठबंधन है। हालांकि, अब एक और राजनीतिक फ्रंट राज्य में सुर्खियां बटोर रहा है। इस फ्रंट को बनाने वाला कोई नेता नहीं, बल्कि अजमेर शरीफ के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी सूफी मजार (बंगाल के टालटोला स्थित फुरुफुरा शरीफ) के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी हैं। 34 साल के सिद्दीकी बंगाल चुनाव के लिए गुरुवार को ही एक फ्रंट का ऐलान कर सकते हैं।

सिद्दीकी के मुताबिक, उनका गठबंधन 10 पार्टियों के साथ होगा और वे 60 से 80 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। सिद्दीकी की मानें तो उनके गठबंधन में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी शामिल हो सकती है, जो कि काफी पहले ही बंगाल में चुनाव लड़ने की मंशा जता चुकी है। बताया जाता है कि 3 जनवरी को ओवैसी ने सिद्दीकी से इसी सिलसिले में मुलाकात भी की थी।

बंगाल में भाईजान के नाम से लोकप्रिय हो रहे पीरजादा सिद्दीकी फिलहाल पूरे राज्य का दौरा कर रहे हैं। वे खुद को मुस्लिमों, दलितों और आदिवासियों की आवाज तक करार दे रहे हैं। साथ ही उनके हमले मुख्य तौर पर सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस और भाजपा पर केंद्रित रहे हैं। सिद्दीकी का कहना है कि टीएमसी की वजह से ही बंगाल में भाजपा का उदय हुआ है। खास बात यह है कि अगर यह राजनीतिक फ्रंट बनता है, तो सिद्दीकी के 26 साल के भाई पीरजादा नौशाद चुनाव में उम्मीदवार बनेंगे। नौशाद इतिहास में मास्टर डिग्री रखने के साथ बीएड भी कर चुके हैं।

माना जा रहा है कि सिद्दीकी अगर अपनी पार्टी चुनाव में उतारते हैं, तो वे मुस्लिम वोटों का एक बड़ा हिस्सा ले जाएंगे। दक्षिण बंगाल में मुस्लिमों के यह वोट अब तक तृणमूल को मिलते थे, जबकि उत्तर बंगाल में यह कांग्रेस की झोली में जाते रहे थे। यानी दोनों ही तरफ ध्रुवीकरण की वजह से तृणमूल और कांग्रेस को बड़ा नुकसान होने का अनुमान है।

अपने राजनीतिक मंसूबों पर सिद्दीकी ने कहा, “सालों के कांग्रेस राज और फिर सीपीएम और तृणमूल के बंगाल में शासन ने मुस्लिमों और गरीबों के लिए कुछ नहीं किया। मैं सिर्फ मुस्लिमों के लिए नहीं बल्कि यहां के गरीब आदिवासियों और पिछड़े वर्ग के लिए भी बात कर रहा हूं। पहले एनआरसी और फिर सीएए की वजह से ही मैंने धार्मिक उपदेश देना बंद किया और राजनीतिक मंच बनाने के लिए काम करना शुरू किया। हमें यकीन है कि हमें अपने लोगों को विधानसभा भेजना होगा, ताकि सही मुद्दों को उठाया जा सके और गलत को रोका जाए।”

सिद्दीकी कहते हैं कि भाजपा देश की दुश्मन है। उन्होंने तृणमूल और अन्य पार्टियों पर अल्पसंख्यकों और गरीबों के वोटों से खेलने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन्हीं पार्टियों की वजह से भाजपा को बंगाल में पैर जमाने का मौका मिला और पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटों पर जीत हासिल की। आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल के वोट काटने के आरोपों पर सिद्दीकी कहते हैं कि उन्होंने टीएमसी को अपने साथ आने का न्योता दिया था। लेकिन उन्होंने बात नहीं सुनी।

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