Mathura News: उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य पर छात्रों को धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने और स्कूल में राष्ट्रगान कराने से रोकने के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके चलते जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाचार्य को निलंबित कर जांच के आदेश दे दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक ये मामला मथुरा के नौझील विकास खंड के एक प्राथमिक विद्यालय का है, जहां प्रधानाचार्य जान मोहम्मद पर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश के आरोप लगे हैं। निलंबन के साथ ही उन्हें मंत विकास खंड के एक प्राथमिक विद्यालय में स्थानांतरित भी किया गया है।

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एक महीने में आएगी जांच रिपोर्ट

बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने मामले की विस्तृत जांच के लिए एक दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है, जो कि एक महीने के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करेगी। यह कार्रवाई भाजपा मंडल इकाई के अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान द्वारा 30 जनवरी को दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की गई।

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राष्ट्रगान गाने से रोका

बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य छात्रों को इस्लाम की ओर प्रेरित कर रहे थे और कथित तौर पर उन्हें नमाज पढ़ने के लिए उकसा रहे थे। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि प्रधानाचार्य ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया और विद्यालय की गतिविधियों के दौरान राष्ट्रगान गाने पर छात्रों को डांटा।

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इस्लाम अपनाने के लिए किया प्रेरित

दुर्गेश प्रधान ने अपने शिकायत पत्र में आरोप लगाया, “प्रधानाचार्य ने हिंदू धर्म के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कीं और छात्रों को अपने माता-पिता से इस्लाम धर्म अपनाने के लिए कहने को कहा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि छात्रों को कथित तौर पर एक मस्जिद जाने के लिए कहा गया और एक इस्लामी समूह के सदस्यों ने छात्रों को इस संबंध में प्रेरित करने के लिए स्कूल का दौरा किया।

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दूसरी ओर प्रधानाचार्य जान मोहम्मद ने आरोपों से इनकार किया और कार्रवाई की तेज़ी पर हैरानी जताई। उन्होंने एक हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के पत्रकार से बातचीत में कहा, “छात्रों को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करने के आरोप पूरी तरह झूठे हैं। सुबह की सभा में प्रार्थना, प्रतिज्ञा (शपथ) और राष्ट्रगान, ये तीन चीजें रोज़ाना होती हैं। किसी भी छात्र या उनके माता-पिता ने कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है और इस मामले में भी, मैं शिकायतकर्ता को नहीं जानता, जिसका राजनीतिक पृष्ठभूमि से होने का दावा किया जा रहा है।”

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अपनी सफाई में क्या-क्या बोले जान मोहम्मद?

प्रिंसिपल जान मोहम्मद मथुरा के बलदेव कस्बे के इस विद्यालय में पढ़ाने से पहले सीमा सुरक्षा बल (BSF) में हवलदार के पद पर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं 2007 से नौझील के इस प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा रहा हूं और मुझे कभी भी ऐसे आरोपों का सामना नहीं करना पड़ा। प्राथमिक विद्यालय के सभी आठ शिक्षक हिंदू हैं और पिछले 19 वर्षों से इस विद्यालय में मेरे पूरे करियर के दौरान मेरा पूरा समर्थन करते रहे हैं।”

मथुरा के पास के गांव राम नागला के रहने वाले और मथुरा के बीएसए कॉलेज से बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की डिग्री प्राप्त करने वाले 53 वर्षीय मोहम्मद ने कहा, “मुझे रविवार की शाम को बीएसए से निलंबन आदेश प्राप्त हुआ, बिना मुझे अपना पक्ष स्पष्ट करने का कोई अवसर दिए।” अधिकारियों के अनुसार, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने 30 जनवरी को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के आधार पर, बीएसए ने प्रधानाचार्य को प्रथम दृष्टया अपने बुनियादी कर्तव्यों का पालन न करने और सरकारी कर्मचारियों पर लागू नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया। क्यों मांगी जा रही संभल की जामा मस्जिद में लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत? डीएम को लिखा पत्र