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माता वैष्णो देवी हादसा: ‘पैसे लेकर जल्दी दर्शन करवाने से बिगड़े हालात’, 25 हजार को अनुमति थी, 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच गए

प्रत्यक्षदर्शियों ने त्रासदीपूर्ण घटना के लिए ‘कुप्रबंधन’ को दोषी ठहराया। दूसरी ओर, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यह कहते हुए आरोपों का खंडन किया कि संभावित भीड़ के मद्देनजर सभी जरूरी प्रबंध किए गए थे।

माता वैष्णो देवी का दर्शन करने के लिए जाते श्रद्धालु। (PHOTO- ANI)

माता वैष्णो देवी मंदिर में मची भगदड़ में बच निकले प्रत्यक्षदर्शियों ने हादसे के लिए श्राइन बोर्ड और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया, ‘श्राइन बोर्ड की तरफ से यात्रियों के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। बड़ी संख्या में बिना पंजीकरण करवाए लोगों को भवन की ओर जाने दिया गया। इससे वहां भीड़ बढ़ गई।

मौके पर तैनात पुलिसकर्मी पैसे लेकर लोगों को जल्द दर्शन करवाने के लिए आगे भेज रहे थे। इससे भीड़ अनियंत्रित हो गई। इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ पुलिस कर्मियों ने लाठीचार्ज कर दिया। लोग भागने लगे। धक्का-मुक्की होने से कुछ लोग गिर गए। पीछे से आ रही भीड़ उन्हें रौंदते हुए आगे बढ़ गई। जमीन पर गिरे लोगों की दम घुटने से मौत हो गई।’

प्रत्यक्षदर्शियों ने त्रासदीपूर्ण घटना के लिए ‘कुप्रबंधन’ को दोषी ठहराया। दूसरी ओर, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यह कहते हुए आरोपों का खंडन किया कि संभावित भीड़ के मद्देनजर सभी जरूरी प्रबंध किए गए थे। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने श्राइन बोर्ड और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

जम्मू में शवगृह के बाहर इंतजार कर रहे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से पहुंचे एक तीर्थयात्री ने कहा, ‘इस त्रासदीपूर्ण हादसे का कारण केवल कुप्रबंधन है। उन्हें भीड़ बढ़ सकने की जानकारी थी, लेकिन लोगों को बेरोक-टोक आने की अनुमति दी।’ तीर्थयात्री ने कहा कि कई लोग वापस जाने के बजाय, जमीन पर आराम कर रहे थे और इसके कारण भवन में और भीड़ बढ़ गई। इस भगदड़ में अपने मित्र अरुण पी सिंह (30) को खो देने वाले एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आए थे और भवन में बहुत भीड़ थी।

उन्होंने कहा, ‘भारी भीड़ देखकर मुझे हैरानी हुई। इस त्रासदी के बाद हम असहाय थे और हमें तड़के छह बजे तक कोई मदद नहीं मिली।’ बिहार के मुजफ्फरपुर की रानी देवी ने कहा, ‘मैंने कई लोगों को जमीन पर मृत पड़े देखा और मेरा मन व्यथित हो गया।’ तीर्थयात्री आदित्य शर्मा ने कहा कि जमीन पर सो रहे कुछ लोग भगदड़ में कुचले गए।

तीन बच्चों समेत अपने परिवार के पांच अन्य सदस्यों के साथ पहुंची रेखा ने कहा, ‘हम पठानकोट से हैं। हम भगदड़ के कारण दर्शन किए बिना ही भवन से लौट गए।’ मध्य प्रदेश में ग्वालियर के रहने वाले प्रेम सिंह ने कहा कि भवन में पूरी तरह से अव्यवस्था की स्थिति थी। क्योंकि न तो तीर्थयात्रियों की संख्या पर प्रतिबंध था और ना ही कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा था।

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