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आतंकियों में फर्क करना ठीक नहीं, भारत ने चीन से कहा

चीन की पांच दिवसीय यात्रा के बाद लौटे पर्रीकर ने कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चीनी सैनिकों की मौजूदगी पर भी चिंता जताई।

Author नई दिल्ली | April 22, 2016 1:38 AM
चीनी रक्षामंत्री से मिलते भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर। (पीटीआई फोटो)

भारत ने चीन से स्पष्ट रूप से कहा है कि आतंकवादियों के बीच विभेदीकरण नहीं हो सकता क्योंकि सभी एक समान हैं। पठानकोट आतंकवादी हमले के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित करवाने के भारत के प्रयास को चीन की तरफ से रोके जाने के कुछ दिनों बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने गुरुवार को यह बात कही।

चीन की पांच दिवसीय यात्रा के बाद लौटे पर्रीकर ने कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चीनी सैनिकों की मौजूदगी पर भी चिंता जताई। इसके अलावा उन्होंने सीमा मुद्दे सहित विभिन्न महत्त्वपूर्ण मामलों पर चर्चा की और दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी बात की। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा- मैंने स्पष्ट रूप से उनसे कहा है कि आतंकवादियों के बीच विभेदीकरण नहीं हो सकता। सभी आतंकवादी एक समान हैं और उनसे एक सिद्धांत के तहत निपटा जाना चाहिए। इसमें संयुक्त राष्ट्र में उन्होंने जिस मामले (अजहर) पर बाधा डाली वह भी शामिल है। उन्हें इससे भी उसी तरीके से निपटना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने चीनी समकक्ष वांग ई के साथ वार्ता में इस मुद्दे को और विस्तार से उठाया था। इस महीने की शुरुआत में चीन ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति को जैश प्रमुख अजहर को आतंकवादी घोषित करने से रोका था और कहा कि मामला सुरक्षा परिषद की जरूरतों को पूरा नहीं करता। पर्रीकर ने कहा कि भारत ने चीन से अपनी चिंताओं को स्पष्ट और ठोस तरीके से व्यक्त किया।

पर्रीकर ने कहा- मुद्दे को उठाया गया और भारत की चिंताओं से स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया। संभवतया पहली बार इसे स्पष्ट और ठोस तरीके से उठाया गया। निश्चित रूप से उनके अपने तर्क हैं। अपने मुद्दों को उठाने में हमें झिझक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दौरे की मुख्य बातों में सतत वार्ता, आदान-प्रदान, दोनों देशों की सेनाओं के बीच ज्यादा बातचीत पर संयुक्त रूप से निर्णय करना था ताकि कोई अप्रिय, अवांछनीय घटना होने की संभावनाएं कम हों।

पर्रीकर ने कहा कि रक्षा को लेकर 2006 में हस्ताक्षर किए गए सहमति पत्र के संशोधित संस्करण को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। यह पूछने पर कि क्या चीन ने अमेरिका के साथ भारत के साजो-सामान समझौता पर दस्तखत करने के मुद्दे को उठाया तो पर्रीकर ने कहा- हां। मंत्री ने कहा कि उन्होंने इसका जिक्र किया लेकिन मीडिया जिस तरह से सोच रहा था, उस तीव्रता के साथ नहीं। निश्चित रूप से उन्होंने इसका जिक्र किया और हमने स्पष्ट कर दिया कि विभिन्न विदेश नीति पर भारत का रुख स्वायत्त है जिसमें यह समझौता भी शामिल है और भारत अपने देश की सुरक्षा और सामरिक हितों को देखते हुए यह निर्णय करता है।

दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हॉटलाइन बनाने पर पर्रीकर ने कहा कि यह बहुत जल्द हकीकत में तब्दील होगा। उन्होंने कहा कि अपने चीनी समकक्ष के साथ बैठक के छह घंटे के अंदर चीन को प्रस्तावित मसौदा मिल गया। मंत्री ने कहा कि मसौदा को अंतिम रूप दिए जाने से पहले कई बार यह इधर-उधर जाएगा। पर्रीकर ने कहा कि सीमा बैठक केंद्रों को बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चर्चा काफी खुले और सकारात्मक माहौल में हुई। चीजों को बेहतर तरीके से प्रबंध किए जाने के अच्छे मौके प्रतीत हो रहे हैं। बेहतरीन संवाद वक्त की जरूरत है। हम अपनी बातचीत बढ़ाने और बेहतर सीमा प्रबंधन करने को लेकर सहमत हैं। सीमा विवादों का बेहतरीन समाधान वास्तविक नियंत्रण रेखा को अंतिम रूप देना है क्योंकि सीमा के अलग-अलग विचार से घुसपैठ के मामले बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचार के कारण तकनीकी घुसपैठ बढ़ती है। हमारा मानना है कि यह घुसपैठ है, लेकिन वे (चीनी सैनिक) गश्त लगा रहे होते हैं। वे आते-जाते हैं। इस तरह की घटनाओं में कमी आई है।

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