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भाई की मौत पर बहन को मिल गए 51.75 लाख का मुआवजा, जानें क्यों?

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो जाने पर उसकी शादीशुदा बहन को 51.75 लाख रूपए का मुआवजा देने की घोषणा करते हुए कहा कि कानूनी उत्तराधिकारी मुआवजे के अधिकारी हैं, फिर भले ही वे मृतक पर आश्रित न हों।

Author ठाणे ( महाराष्ट्र) | Updated: April 6, 2016 1:25 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो जाने पर उसकी शादीशुदा बहन को 51.75 लाख रूपए का मुआवजा देने की घोषणा करते हुए कहा कि कानूनी उत्तराधिकारी मुआवजे के अधिकारी हैं, फिर भले ही वे मृतक पर आश्रित न हों।

दावाकर्ता दिव्या आलोक श्रीवास्तव ने ठाणे एमएसीटी को सूचित किया था कि आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में काम कर प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रूपए कमाने वाले उनके 27 वर्षीय भाई अभिषेक कुमार ने 23 मई 2007 को वन साईं नेटवर्क एजेंसी से एक टैक्सी किराए पर ली थी और वह अपने माता-पिता के साथ दर्शन करने शिरडी गया था।

अगली सुबह, पुणे जाने के दौरान कार चालक सागर विलास लोखंडे कथित तौर पर तेज गति से कार चला रहा था। वह वाहन पर से अपना नियंत्रण खो बैठा और कार सड़क के किनारे लगे पेड़ से जा टकराई।

दुर्घटना में दावाकर्ता के पिता, माता, भाई अभिषेक और टैक्सी चालक की मौके पर मौत हो गई। दिव्या ने आरोप लगाया कि यह दुर्घटना सिर्फ चालक की लापरवाही के चलते हुई और वह अपने भाई की मौत के लिए मुआवजे की उत्तराधिकारी है।

टैक्सी का मालिक इस दावे के खिलाफ न्यायाधिकरण में नहीं आया जिसके चलते फैसला एकपक्षीय तरीके से दावाकर्ता के पक्ष में सुना दिया गया।

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