महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम फैसला बुधवार को लिया है। दरअसल, राज्य सरकार ने कमर्शियल पैसेंजर व्हीकल यानी की ओला, उबर जैसी कंपनियों के ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य कर दी है।
कैब चलाने के लिए मराठी आना जरूरी
राज्य के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाईक ने बुधवार को इस फैसले को लागू करने का ऐलान किया। सरनाईक के मुताबिक, अब राज्य में ओला, उबर और रैपिडो जैसे कैब एग्रीगेटर्स के जरिए चलने वाले ड्राइवरों को राज्य के भाषा नियमों से छूट नहीं मिलेगी।
महाराष्ट्र मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में बदलाव के बाद लिया फैसला
महाराष्ट्र का भाषा नियम अब ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवरों पर भी लागू होगा। इस नियम के तहत राज्य के कमर्शियल पैसेंजर गाड़ी के ड्राइवर पहले से ही आते हैं, लेकिन अब ऐप बेस्ड कैब ड्राइवरों पर भी यह नियम लागू होगा। राज्य के परिवहन मंत्री ने कहा कि ड्राइवरों के लिए पैसेंजर से अच्छे से बातचीत करने के लिए मराठी की प्रैक्टिकल जानकारी जरूरी है। यह कदम महाराष्ट्र मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में कई बदलावों के बाद उठाया गया है।
किन ड्राइवरों पर लागू होगा नियम?
महाराष्ट्र मोटर व्हीकल रूल्स में किए गए बदलावों के बाद कमर्शियल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट से जुड़े ड्राइवरों के लिए मराठी की वर्किंग नॉलेज को जरूरी किया गया है। इसमें ऐप के जरिए बुक होने वाली कैब चलाने वाले ड्राइवर भी शामिल हैं। यानी ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों को इस नियम से छूट नहीं मिलेगी।
रूल फॉलो नहीं करने पर क्या होगा?
महाराष्ट्र सरकार के नए नियम को जो फॉलो नहीं करेगा उस पर कार्रवाई होगी। नए नियम के मुताबिक, अगर कोई ड्राइवर मराठी की अनिवार्यता को फॉलो नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई में ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक सस्पेंड करना या कुछ परिस्थितियों में लाइसेंस कैंसिल करना भी शामिल है। हालांकि, इसके लिए संबंधित अधिकारी को पहले लिखित नोटिस देना होगा।
ड्राइवरों को मराठी की ट्रेनिंग भी दी जा रही
महाराष्ट्र परिवहन विभाग कुछ मराठी साहित्यिक संस्थाओं के साथ मिलकर ड्राइवरों के लिए 105 दिन का मराठी ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रहा है। इसका उद्देश्य ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाली मराठी सिखाना है। विभाग के मुताबिक, अब तक 1.10 लाख से ज्यादा गैर-मराठी पैसेंजर वाहन ड्राइवर चार घंटे का ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा कर चुके हैं।
यह भी पढ़ें: ऑटो ड्राइवर्स के लिए मराठी अनिवार्य करना चाहते फड़नवीस, दूसरे राज्यों के बीजेपी नेता ही हो रहे असहज
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करना चाहते हैं। अभी इस फैसले पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन इस एक विचार ने ही बीजेपी के कई नेताओं को असहज कर दिया है। दूसरे राज्यों के कई नेता इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, इससे पैदा होने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाल रहे हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…
