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रोजाना 300 गरीब और भूखे लोगों को फ्री में खाना खिलाता है ये चाय वाला

मकबूल अहमद 1 मई 2013 से भूखे लोगों को फ्री में खिला रहे हैं।

मकबूल पहले अपनी चाय की दुकान से होने वाले मुनाफे से ही लोगों को खाना खिलाते थे। (प्रतीकात्मक फोटो)

भोपाल में मकबूल अहमद गरीबों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं। मकबूल रोजाना 300 लोगों को फ्री में खाना खिलाते हैं। ऐसा नहीं है कि मकबूल ने यह जल्दी में शुरू किया है। वह 1 मई 2013 से भूखे लोगों को खाना खिला रहे हैं। मकबूल शहर में ही एक चाय की दुकान करते हैं। मकबूल ने बताया कि पहले वह अपनी चाय की दुकान से होने वाले मुनाफे से ही लोगों को खाना खिलाते थे। अगर पैसे कम पड़ जाते थे तो घर से पैसा लाकर लोगों को खाना खिलाते थे। धीरे-धीरे जब लोगों को मकबूल के इस अच्छे काम के बारे में पता चला तो लोग उनसे जुड़ने लगे।

मकबूल का मानना है कि अब अल्लाह कि इस रसोई में हजारों लोग भी आ जाएं तो यहां से भूखे पेट वापस नहीं जाएंगे। हमें दूसरे लोगों से सीखने की जरूरत है। अगर सभी थोड़ा-थोड़ा दूसरों के लिए करेंगे तो देश में कोई भूखा नहीं रहेगा। मकबूल के साथ काम करने वाले लोगों में दूसरी जगहों से काम की तलाश में आए लोग हैं। उनके साथ मजदूर, ठेले वाले, भिखारी आदि काम करते हैं। वह यहां आकर अपना पेट भरते हैं और कहीं भी सो जाते हैं। ये गरीब लोग इस नेक काम के लिए मकबूल को दुआएं दे रहे हैं। मकबूल के पास उतना पैसा नहीं है कि वह सभी को अपने पैसे से खाना खिला सके।

मकबूल के इस काम में शहर के सभी वर्गों के लोग भी उसका साथ दे रहे हैं। स्थानीय लोग चाह रहे हैं कि मकबूल का इस काम में ज्यादा से ज्यादा साथ दिया जाए जिससे कि शहर में और कई जगह ऐसे फ्री खाना बांटने की व्यवस्था की जा सके। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार ने गरीबों को खाना खिलाने के लिए दीनदयाल रसोई की व्यवस्था की थी। इसमें गरीबों को पांच रुपये में खाना मिलता है। लेकिन लोगों की तरफ से दान नहीं मिलने की वजह से सरकार की यह योजना लड़खड़ाने लगी। यह योजना भाजपा के विचारक दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर शुरू की गई थी। इस योजना को राज्य सरकार ने 7 अप्रैल को एक साथ 49 जिलों में लागू किया था।

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