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बीजेपी एमएलसी ने पुराने नोट एक्‍सचेंज कराने को लिए 5 करोड़! माओवादियों ने चाचा को मारी गोली

माओवादी अपने पीछे कुछ पम्पलेट छोड़ गए, जिनमें आरोप लगाया गया है कि एमएलसी उनके 7 करोड़ रुपये नहीं लौटा रहा है जिसमें से पांच करोड़ रुपये नोटबंदी के दौरान नए नोट्स से पुराने नोट्स बदलने के लिए दिए गए थे। आईजी (ऑपरेशन) कुंदन कृष्णन ने बताया माओवादियों ने एमएलसी के घर का दरवाजा खटखटाया जिसे चाचा ने खोला था। वहां हाथापाई हुई और माओवादियों ने एमएलसी के चाचा को गोली मार दी।

Author Published on: December 31, 2018 12:04 PM
प्रतीकात्मक चित्र।

बिहार के औरंगाबाद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एमएलसी राजन कुमार सिंह के 65 वर्षीय चाचा नरेंद्र प्रसाद सिंह की माओवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (29 दिसंबर) की रात करीब साढ़े नौ बजे औरंगाबाद के देव पुलिस थाने के अंतर्गत सुदी बीगा इलाके में माओवादियों ने एक कम्युनिटी हॉल को उड़ा दिया, 11 वाहनों में आग लगा दी और एक बढ़ई के घर को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद माओवादी चकरबंधा हिल्स की तरफ भाग गए। माओवादी अपने पीछे कुछ पम्पलेट छोड़ गए, जिनमें आरोप लगाया गया है कि एमएलसी उनके 7 करोड़ रुपये नहीं लौटा रहा है जिसमें से पांच करोड़ रुपये नोटबंदी के दौरान नए नोट्स से पुराने नोट्स बदलने के लिए दिए गए थे। आईजी (ऑपरेशन) कुंदन कृष्णन ने बताया माओवादियों ने एमएलसी के घर का दरवाजा खटखटाया जिसे चाचा ने खोला था। वहां हाथापाई हुई और माओवादियों ने एमएलसी के चाचा को गोली मार दी। कुंदन कुमार के मुताबिक बिहार में ऐसा पहली बार है जब माओवादियों ने अपने पीछे पम्पलेट छोड़े हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माओवादियों ने एमएलसी के घर के पर आईईडी भी प्लांट किया था लेकिन वे धमाका नहीं कर पाए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एमएलसी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट वाले कामों में लिप्त था। सीपीआई (माओइस्ट) ने पम्पलेट में स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई बीजेपी और आरएसएस के जमीनी कार्यकर्ताओं से नहीं है लेकिन राजन, गुडों और अन्य ठेकेदारों जैसे लोगों से है। एमएलसी ने आरोपों से इनकार किया है। एमएलसी ने कहा, ”वे झूठ बोल रहे हैं। मैं उनसे रुपये क्यों लूंगा?” एमएलसी के मुताबिक माओवादी उससे 2015 से लेवी के तौर पर 2 करोड़ रुपये मांग रहे थे।

एमएलसी ने आगे कहा, ”पिछले साल मेरी जान को खतरे के बारे में मैंने डीजीपी और औरंगाबाद एसपी को लिखा था लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालांकि मुझे औरंगाबाद में एक एस्कॉर्ट वाहन उपलब्ध कराया गया था।” एक सीनियर आईपीएस अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर टीओआई को बताया कि राजन और कुछ अन्य नेता बिहार के माओवादी-प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में लिप्त थे जहां दूसरे ठेकेदार डर के मारे काम नहीं करते हैं। अधिकारी ने कहा कि माओवादी प्रभावित इलाके में उनकी स्वीकृति के बिना कोई भी निर्माण कार्य नहीं कर सकता है।

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