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कई राजनीतिक पार्टियों को बदलने पड़ेंगे नाम, नहीं बदले तो रद्द होगी मान्यता, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और EC को भेजा ऐसा नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट में एक भाजपा नेता द्वारा याचिका दायर की गई है। इस याचिका के तहत अपील की गई है कि धर्म,जाति या भाषा से संबंधित चिह्नों का इस्तेमाल राजनीतिक पार्टिया द्वारा अपने नाम में नहीं किया जाना चाहिए।

Author दिल्ली | May 24, 2019 2:55 PM
दिल्ली हाई कोर्ट फोटो सोर्स- जनसत्ता

दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग और क्रेंद को नोटिस जारी किया है। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। जिसके अंतर्गत धर्म,जाति, भाषा सें संबंधी प्रतीकों का इस्तेमाल करने वाले राजनीतिक पार्टियों की समीक्षा करने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही दायर याचिका में यह अपील भी की गई है कि अगर तीन महीने के अंदर पार्टियां इनमें बदलाव नहीं करती हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा।

भाजपा नेता ने दायर की याचिकाः भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका में यह तर्क दिया कि राष्ट्रीय ध्वज या धर्म संबंधी प्रतीकों का इस्तेमाल उम्मीदवार के चुनाव की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। साथ ही जनप्रतिनिधि एक्ट (1951) के तहत इसे भ्रष्ट गतिविधि का हिस्सा माना जाएगा।
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पेशे से वकील हैं भाजपा नेताः उपाध्याय जो पेशे से वकील भी है ने दावा किया है कि इस तरह के कदम से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

आचार संहिता का उल्लंघन कियाः अपनी याचिका में उपाध्याय ने राजनीतिक पार्टियों जैसे हिंदू सेना, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नाम लिए जिनमें जाति, धर्म या भाषा आदि के नाम आते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजें जनप्रतिनिधि एक्ट और आचार संहिता के खिलाफ हैं।

 

कई पार्टियां करती है झंडे का इस्तेमालः याचिका में कहा गया है, ‘इसके अलावा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित कई राजनीतिक पार्टियां हैं, जो राष्ट्रीय ध्वज के जैसे झंडे का उपयोग करती हैं, जो कि जनप्रतिनिधि एक्ट के खिलाफ है।’ बता दें शुक्रवार (23 मई) देश में 17 वें लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए हैं। इन चुनावों में एनडीए को लगभग 350 के करीब सीटें मिली हैं। चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस अनूप जे भंभानी की डिवीजन बेंच ने चुनाव आयोग को अगली पोस्टिंग तारीख 17 जुलाई से पहले अपनी प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया है।

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