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पर्रिकर जैसा कोई नहींः गोवा के सीएम के तौर पर बने सादगी की मिसाल, पढ़ें मनोहर की जिंदगी की दस बड़ी बातें

रविवार (17 मार्च) को मनोहर पर्रिकर का पैंक्रियाटिक कैंसर की वजह से निधन हो गया। पर्रिकर हमेशा से ही अपने काम के साथ ही साथ सादगी के लिए भी पहचाने जाते थे। ऐसे में जानें उनके जीवन की दस बड़ी बातें..

goa cm manohar parrikarगोवा सीएम मनोहर पर्रिकर फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस

मनोहर पर्रिकर का पैंक्रियाटिक कैंसर की वजह से रविवार (17 मार्च) को निधन हो गया। बता दें कि मनोहर पर्रिकर एक बार रक्षामंत्री और चार बार गोवा के सीएम रह चुके थे। पर्रिकर को उनके पैंक्रियाटिक कैंसर के बारे में फरवरी 2018 में पता लगा था। इसके बाद करीब 6 महीने तक न्यूयॉर्क में उनका इलाज भी किया गया था लेकिन आखिरकार डॉक्टर्स ने भी हाथ खड़े कर दिए थे, जिसके बाद मनोहर वापस गोवा आ गए और अपने आखिरी समय तक काम करते रहे। मनोहर पर्रिकर हमेशा ही सादा जीवन उच्च विचार की बात कहते थे। ऐसे में जानें उनके जीवन की दस बड़ी बातें

पहले आईआईटियन जो बनें सीएम: बता दें कि मनोहर पर्रिकर पहले ऐसे आईआईटीयन थे जो किसी राज्य के सीएम बने थे। साल 2001 में मनोहर को आईआईटी बॉम्बे ने विशिष्ट एल्यूमिनी अवॉर्ड से सम्मानित भी किया था।

एक बार रक्षामंत्री और चार बार मुख्यमंत्री रह चुके थे पर्रिकर: बता दें कि 2014-2017 तक मनोहर पर्रिकर रक्षामंत्री रहे थे। वहीं बात सीएम पद की करें तो 24 अक्टूबर 2000 को पर्रिकर पहली बार सीएम बने थे। इसके बाद 2002 से 2005, तीसरी बार 2012-2014 और चौथी बार 2017-2019 तक वो गोवा के सीएम पद पर रहे।

16-18 घंटे करते थे काम: गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र आर्लेकर राजेन्द्र आर्लेकर बताते हैं कि जब वो बीमार नहीं थे तो 16-18 घंटे काम करते थे। एक किस्से का जिक्र करते हुए राजेन्द्र ने बताया कि एक बार वह आधी रात तक अपने ओएसडी गिरिराज वरनेकर के साथ किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। ऐसे में जाते वक्त वरनेकर ने पूछा की किल किस वक्त आना है तो जवाब मिला थोड़ी देर से आ सकते हो। तो सुबह 6:30 तक आ जाना। ऐसे में जब सुबह वरनेकर ऑफिस पहुंचे तो पता लगा कि पर्रिकर सुबह करीब 5:15 से ही काम में जुट गए थे।

अगर मैं बैठ जाऊंगा तो बीमार हो जाऊंगा: राजेन्द्र बताते हैं कि पर्रिकर को करीब एक साल पहले ही पता लगा था कि उनको कैंसर है। लेकिन इस बात का असर उनके काम पर थोड़ा बहुत ही पड़ा था। वे इलाज के लिए अमेरिका गए। लेकिन वहां से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर काम की मॉनीटरिंग करते रहते। वो अक्सर कहते थे कि अगर मैं बैठ जाऊंगा तो बीमार हो जाऊंगा। शायद इसलिए वह कड़ी धूप में भी निर्माणधीन पुल का जायजा लेने पहुंच गए थे। कैंसर के बाद भी जिस दिन वह ऑफिस नहीं आ पाते उस दिन घर से ही काम करते थे। घर पर मंत्रिमंडल की बैठक लेते थे।

CM होकर भी सड़क पर उतरकर कर रहे थे ट्रैफिक कंट्रोल: राजेन्द्र आर्लेकर ने एक किस्से को याद करते हुए बताया कि 2004 के फिल्म फेस्टिवल में सब मेहमान भी हैरान रह गए थे जब खुद मनोहर पर्रिकर पसीने से लथपथ होकर पुलिसवालों के साथ ट्रैफिक कंट्रोल कर रहे थे। वहीं उनके बेटे की शादी में सभी मेहमान सूट-बूट में थे तो वहीं पर्रिकर हाफ शर्ट, क्रीज वाली साधारण पैंट और सैंडिल में मेहमानों का स्वागत कर रहे थे।

हॉफ शर्ट और हवाई चप्पल थी पहचान: कई ऐसे मौके होते थे जब मनोहर पर्रिकर हार्फ स्लीव शर्ट, क्रीज वाली सादा पैंट और हवाई चप्पल में नजर आते थे। इसके साथ ही ये उनका स्टेटमेंट भी बन गया था।

सूट-बूट नहीं था पसंद: छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह पर्रिकर के बारे में एक किस्सा बताते हैं कि एक बार उन्होंनें पर्रिकर से पूछा कि वो गलाबंद सूट या टाई-सूट क्यों नहीं पहनते? इस पर पर्रिकर ने जवाब दिया था कि वो उन्हें फंदे जैसे लगते हैं। लेकिन पैंट-शर्ट में वह कंफर्टेबल महसूस करते हैं।

बिना सुरक्षा के टी- स्टॉल पर चाय पीते आते थे नजर: बता दें कि पर्रिकर प्रदेश के मुखिया होने के बाद भी सादा जीवन जीते थे। वो कई बार किसी कॉमन से टी- स्टॉल पर चाय पीते नजर आते थे। तो कभी बच्चों के साथ क्रिकेट- फुटबॉल खेलते। वहीं कभी वो बिना सुरक्षा के स्कूटी पर निकल जाते थे।

आम आदमी की तरह लग जाते थे लाइन में: सोशल मीडिया पर कई ऐसी फोटोज हैं जिसमें पर्रिकर किसी आम आदमी की तरफ लाइन में लग जाते। वहीं कभी किसी ढाबे में भोजन करते दिख जाते।

 

अंजाम जानने के बाद भी अंत तक मुस्कुराते रहे पर्रिकर: न्यूयॉर्क जाने से पहले मनोहर पर्रिकर का इलाज मुंबई के लीलावती अस्पताल में भी चला था। पर्रिकर का इलाज करने वाले अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. पी. जगन्नाथ कहते हैं कि वो अपना अंजाम जानते थे लेकिन फिर भी हमेशा मुस्कुराते रहे। डॉक्टर बताते हैं कि वो अस्पताल में भी अक्सर ऑफिस का काम करते रहते थे। वहीं पर्रिकर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वो हमेशा ऐसे व्यक्ति के रूप में याद रहेंगे जो परिणाम जानने के बाद भी अंत तक मुस्कुराकर सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ते रहे।

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