मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच बढ़ा तनाव अब आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डालने लगा है। राज्य में जारी बंधक संकट और हाईवे बंद होने की वजह से सैकड़ों ट्रक अलग-अलग जगहों पर फंस गए हैं। इसके कारण जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो रही है और हालात लगातार गंभीर बनते जा रहे हैं।

करीब नौ दिन बीत जाने के बाद भी छह लापता नागा लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं दूसरी ओर 14 कुकी लोगों को अब भी बंधक बनाकर रखा गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में तनाव और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

दरअसल, 13 मई को मणिपुर के कांगपोकपी और सेनापति जिलों में हालात अचानक बिगड़ गए थे। इससे पहले तीन चर्च नेताओं की हत्या की घटना सामने आई थी, जिसके बाद नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया। दोनों पक्षों के कई ग्रामीणों को अगवा कर लिया गया और उन्हें बंधक बनाकर रखा गया।

कांगपोकपी जिला कुकी-जो समुदाय बहुल क्षेत्र है, जबकि सेनापति जिला नागा बहुल इलाका माना जाता है। दोनों समुदायों के बीच पूरे दिन चली तनातनी के बाद 14-14 लोगों को रिहा कर दिया गया था। हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।

नागा संगठनों का आरोप है कि छह नागा लोगों को कुकी समूहों ने अगवा किया था और वे अब भी लापता हैं। इसी मांग को लेकर सेनापति जिले में नागा संगठनों ने 14 कुकी लोगों को अपने कब्जे में रखा हुआ है। उनका कहना है कि जब तक छहों नागा लोगों का पता नहीं चलता, तब तक वे बंदियों को नहीं छोड़ेंगे।

दूसरी तरफ कुकी समूहों का कहना है कि उन्होंने सभी बंधकों को पहले ही रिहा कर दिया था और उन्हें इन छह लापता लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इन छह लोगों की तलाश में सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। कांगपोकपी और आसपास के पहाड़ी इलाकों में संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन जारी है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

इस बीच दोनों समुदायों के संगठनों ने अपने-अपने इलाकों में विरोध प्रदर्शन और बंद जारी रखा है। कुकी इंपी मणिपुर ने राज्य के कुकी-जो बहुल जिलों में बंद का ऐलान कर रखा है। वहीं यूनाइटेड नागा काउंसिल ने नागा इलाकों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। मणिपुर की भौगोलिक स्थिति की वजह से इस नाकेबंदी का असर पूरे राज्य पर पड़ रहा है। राज्य का मैदानी हिस्सा मुख्य रूप से मैतेई समुदाय बहुल है, जबकि चारों तरफ पहाड़ी इलाकों में नागा और कुकी-जो समुदाय रहते हैं। ऐसे में राज्य के लगभग सभी प्रमुख हाईवे इन इलाकों से होकर गुजरते हैं।

मणिपुर में सामान पहुंचाने के लिए दो मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग सबसे अहम माने जाते हैं। पहला एनएच-02 है, जो नागालैंड के दीमापुर से होकर आता है। दूसरा एनएच-37 है, जो असम के सिलचर से मणिपुर को जोड़ता है। इन मार्गों पर रुकावट आने से पूरे राज्य की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

ऑल जिरीबाम रोड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता एल मैनिटन सिंह ने बताया कि सिलचर से जिरीबाम होते हुए आने वाले ट्रकों की आवाजाही इस सप्ताह सुरक्षा बलों की निगरानी में शुरू कराई गई थी। लेकिन एनएच-02 पर जारी नाकेबंदी की वजह से अब भी बड़ी संख्या में ट्रक फंसे हुए हैं।

सेनापति ट्रक ओनर्स एसोसिएशन से जुड़े डी बी मावियो ने बताया कि अलग-अलग स्थानों पर सैकड़ों ट्रक रुके हुए हैं। उनके मुताबिक, नागालैंड से मणिपुर में प्रवेश करने वाले माओ और तादुबी के बीच करीब 200 ट्रक फंसे हैं। मक्हान इलाके में 150 से ज्यादा ट्रक खड़े हैं। सबसे ज्यादा, यानी 400 से अधिक ट्रक कांगपोकपी जिले से पहले वाले हिस्से में अटके हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इन ट्रकों में आलू, प्याज और निर्माण सामग्री जैसे जरूरी सामान लदे हुए हैं। लंबे समय तक ट्रकों के फंसे रहने से बाजार में जरूरी वस्तुओं की कमी और महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।

कांगपोकपी के डिप्टी कमिश्नर महेश चौधरी ने कहा कि सुरक्षा बल और प्रशासन लगातार संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहे हैं ताकि रास्ते खोले जा सकें और हालात सामान्य बनाए जा सकें।

इसी बीच यूनाइटेड नागा काउंसिल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित एक ज्ञापन सेनापति डीसी कार्यालय में सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि लापता नागा लोगों को “जिंदा या मृत” जल्द से जल्द उनके परिवारों को सौंपा जाए। वहीं कुकी जो काउंसिल ने भी शांति की अपील जारी करते हुए सभी पक्षों से कहा है कि जिन लोगों को बंधक बनाकर रखा गया है, उन्हें बिना देरी संबंधित अधिकारियों और परिवारों को सौंप दिया जाए।

मणिपुर में जारी यह संकट अब केवल दो समुदायों के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

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13 मई 2026 को मणिपुर के कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव के चलते दोनों पक्षों के दर्जनों ग्रामीणों का अपहरण कर उन्हें बंधक बना लिया गया था। दिनभर चले गतिरोध के बाद, दोनों पक्षों ने 15 मई की सुबह 14-14 बंधकों को रिहा कर दिया था। हालांकि, 6 पुरुषों का नाम रिहा किए गए लोगों में शामिल नहीं था। नागा समूहों का आरोप है कि उन्हें कुकी समूहों ने बंधक बना लिया था जबकि कुकी समूहों का कहना है कि उन्होंने सभी बंधकों को रिहा कर दिया है और इन 6 लोगों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। सुरक्षा बल अब उन्हें खोजने के लिए तलाशी अभियान चला रहे हैं, वहीं नागा समूहों का कहना है कि जब तक इन छह लोगों का पता नहीं चल जाता, वे 14 कुकी पुरुषों को बंधक बनाए रखेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक