3 मई 2023 को मणिपुर में शुरू हुए मौजूदा संघर्ष के लगभग तीन साल बाद राज्य अशांति की एक नई लहर की चपेट में है। एक ओर 7 अप्रैल को दो मैतेई बच्चों की हत्या के बाद से मणिपुर की घाटी में विरोध प्रदर्शन हुए तो दूसरी ओर तांगखुल नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव का एक अलग सिलसिला अभी भी सुलग रहा है। तांगखुल नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव इस साल फरवरी में उखरुल जिले में शुरू हुआ था।
माओ नागा समुदाय के एक नेता और युमनाम खेमचंद सरकार में उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो ने मौजूदा हालात के बारे में द इंडियन एक्सप्रेस से बात की।
सवाल-1. 7 अप्रैल के बाद राज्य इतनी अस्थिर स्थिति में क्यों चला गया और सरकार इन प्रदर्शनों से निपटने की किस तरह कोशिश कर रही है?
इस सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो ने कहा, “राज्य की शांति भंग करने के लिए कई तत्वों की संलिप्तता को लेकर कुछ अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन मैं किसी को दोषी नहीं ठहरा सकता। आंदोलनकारियों की मांगे अधिकतर ऐसे मुद्दे हैं जो लंबे समय से चले आ रहे हैं। घाटी में हाल ही में दो बच्चों और उखरुल में दो नागरिकों की हत्याएं ऐसी नई घटनाएं हैं, जिन्होंने इन मुद्दों को फिर चर्चित कर दिया है। आंदोलनकारी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। मणिपुर सरकार ने इन मामलों को एनआईए को सौंप दिया है, लेकिन लोग तुरंत फैसला चाहते हैं, जो मुमकिन नहीं है।”
आगे कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों के अलग-अलग संगठन आंदोलन कर रहे हैं और अपनी मांगें उठा रहे है, और सरकार के लिए उन सभी को पूरा करना मुश्किल है। उखरुल जिले में दो बेकसूर लोगों की हत्या के मामले में, उस इलाके के संगठनों की मुआवजे और अनुग्रह राशि से जुड़ी मांगे पूरी कर दी गई हैं और शवों का दफना दिया गया है, लेकिन एनआईए जांच के नतीजे अभी आने बाकी हैं।
इंफाल घाटी में हुई घटना के मामले में यह पता लगाना मुश्किल है कि इसमें कौन-से समूह और व्यक्ति शामिल हैं। प्रदर्शनकारी एक बार फिर कुकी समूहों के साथ किए गए समझौतों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन यह इतना आसान नहीं है।
सरकार, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री सभी लोग जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सरकार पर फेल होने का आरोप लगाना सही नहीं है। बंद और अशांति की कोई आवश्यकता नहीं है। ये आम लोगों को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं और इनसे हमें कोई भी सकारात्मक परिणाम हासिल नहीं होगा।
सवाल-2. तांगखुल नागाओं और कुकियों के बीच तनाव फरवरी से ही सुलग रहा है क्या ऐसी आशंकाएं है कि यह भी संघर्ष भी लंबा चलेगा?
हर क्षेत्र के लोगों की ओर बातें सामने आ रही है कि वे अब तनाव और हिंसा से परेशान हो चुके हैं। दोनों ही तरफ से तनाव और समस्याएं रही हैं, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, हालात शांत हो रहे हैं। हमें उम्मीद है कि स्थिति में सुधार होगा। चर्च और नागरिक समूहों जैसे विभिन्न संगठन अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं।
सवाल-3. उखरुल में तनाव का समाधान क्या है? चूँकि यह तनाव हाल ही में भड़का है, तो क्या इसे और अधिक बढ़ने से पहले ही इसका कोई हल नहीं निकाला जा सकता?
जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि असल में इसकी मुख्य वजह जमीन से जुड़े विवाद है। इसलिए सरकार के लिए इसे तुरंत सुलझाना मुश्किल है क्योंकि जमीन का विवाद कोई नई बात नहीं है। ये हमेशा से ही है। लेकिन आमतौर पर, लोग अब हिंसा से तंग आ चुके हैं। मणिपुर में नागा लोगों का मैतेई, कुकी और अन्य समुदायों के साथ संघर्ष का एक लंबा इतिहास रहा है। अब नागा लोग किसी भी तरह का संघर्ष नहीं चाहते। इसलिए जब मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष छिड़ा तो नागा लोग तटस्थ रहे, लेकिन बदकिस्मती से लिटान में जमीन के विवाद के चलते यह संघर्ष शुरू हुआ फिर और भड़का और अब तो यह दूसरे इलाकों में भी फैल चुका है। उम्मीद है तनाव जल्द ही कम हो जाएगा।
सवाल-4. जब से आपकी नई सरकार बनी है, तब से नेताओं की ओर से अलग-अलग समुदायों के साथ जुड़ने पर काफी जोर दिया गया है। आप खुद भी चुराचांदपुर गए हैं और वहां के लोगों से बातचीत की है। क्या इसका कोई नतीजा निकला है? भरोसा फिर से जीतने और बातचीत शुरू करने के लिए और क्या करने की आवश्यकता है?
कुकियों के बीच कई अलग-अलग समूह और समुदाय है, जिनकी अपनी अलग पहचान और उम्मीदें हैं, इसलिए कभी-कभी उनके बीच एक संवाद स्थापित करना मुश्किल हो जाता है और सरकार बनने के बाद हमने जोमी समूहों के साथ बातचीत की है और बातचीत के आधार पर पाया कि वे किसी भी तरह की समस्या या संघर्ष नहीं चाहते, बल्कि एक शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। हम देख सकते हैं कि लोग बातचीत के लिए आगे आ रहे हैं और अन्य समूहों के साथ भी बातचीत की गुंजाइश है।
सवाल-5. क्या मौजूदा हालात ने राज्य में शांति प्रक्रियाओं को झटका लगा है?
लोगों को लग सकता है कि यह एक झटका है, लेकिन मेरा मानना है कि इससे सरकार के प्रयासों में पूरी तरह से रुकावट नहीं आ सकती। वैसे भी लोग इस बात पर अडिग है कि संघर्ष खत्म करने के लिए सरकार ही सबसे बेहतरीन व्यवस्था है।
लोगों को लगता है कि जो कुछ भी हो रहा है, वह नई सरकार को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है और सरकार के नुमाइंदे होने के नाते हमें भी अलग-अलग पक्षों की अनावश्यक दखलंदाजी का संदेह है, लेकिन हम इसे खतरे के तौर पर नहीं देख रहे। हमारा मानना है कि स्थिति अब काफी बेहतर है। हमने कुकी गांवों में जाकर अलग-अलग लोगों से मुलाकात की है। ऐसे में इन बातों के बावजूद जनता की प्रतिक्रिया अब भी पॉजिटिव है।
सवाल-6. राज्य में हालात को बेहतर बनाने के लिए केंद्र का क्या रोडमैप है?
उन्होंने कहा कि वे जहां भी जरूरत हो, वहां अधिक सुरक्षा देना चाहते हैं। पिछले कुछ सप्ताह और महीनों में अलग-अलग राज्यों में चुनावी ड्यूटी के कारण सुरक्षा बलों का एक बड़ा हिस्सा कम हो गया है। करीब 90 कंपनियां हटाई गई हैं। इन्हें वापस बुलाया जाएगा और संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जाएगा। जनता ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की है, जिस सरकार अभी पूरा नहीं कर पा रही है।
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मणिपुर में कुछ दिनों तक हालात थोड़े सामान्य रहने के बाद हिंसा की घटनाएं फिर से अपने पांव पसारने लगी हैं। सरकार का दावा है कि इसके पीछे असामाजिक तत्त्वों की भूमिका ज्यादा है, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि राज्य के लोगों में असंतोष की वजह से विरोध प्रदर्शनों का दौर लौटने लगा है, जो सौहार्दपूर्ण वातावरण के लिए निश्चित रूप से चिंताजनक है। इंफाल पश्चिम जिले में बीते शुक्रवार को हजारों लोगों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए मशाल रैली निकाली और इस दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी हिंसक झड़पें भी हुईं। आगे की खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
