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वृन्दावन में होगा विधवाओं का सबसे बड़ा घर, मेनका गांधी ने किया आश्रय सदन का शिलान्यास

इस घर में भूतल से अलावा तीन मंजिले होंगी जिनमें रैम्प, लिफ्ट, बिजली, पानी की आपूर्ति तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध होगी।

Author मथुरा | March 29, 2016 6:57 PM
Maneka gandhi, Vrindavan widow Home, Vrindavan, Mathuraमहिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी। (फाइल फोटो)

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी मंगलवार (29 मार्च) को वृन्दावन के सुनरख बांगर क्षेत्र में निराश्रित एवं विधवा महिलाओं के लिए प्रस्तावित एक हजार की क्षमता वाले आश्रय सदन का शिलान्यास किया। इस आश्रय सदन का निर्माण कार्य पहले से ही प्रारंभ कर दिया गया है तथा इसे मार्च 2018 तक पूर्ण कर लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह देश में सरकार द्वारा विधवाओं के लिए स्थापित अथवा वित्तपोषित सबसे बड़ा घर होगा।

उन्होंने बताया, ‘पिछले दिनों कराए गए निरीक्षण में वृन्दावन में मौजूद स्वाधार घर में रह रहीं विधवाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई थी। इसलिए वृन्दावन की विधवाओं को रहने की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय ने सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त 1000 शैय्याओं वाले घर का निर्माण कराने का निर्णय लिया।’

महिला एवं बाल कल्याण मंत्री ने बताया, ‘‘मंत्रालय स्वाधार और अल्पकालिक प्रवास गृह योजना के अधीन बिना सामाजिक और आर्थिक मदद वाली संकटग्रस्त महिलाओं के आश्रय, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा उपचार और देखभाल करने जैसी प्राथमिक जरूरतों को पूरा करता है। इन दोनों योजनाओं को 1 जनवरी 2016 से आपस में मिलाकर ‘स्वाधार गृह’ का नाम दिया गया है।’

इस एक हजार की क्षमता वाले आश्रय सदन की भूमि के मूल्य सहित अनुमानित लागत लगभग 57 करोड़ रुपए है। इसका राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) के माध्यम से 1.424 हेक्टेयर भूमि में निर्माण किया जा रहा है। इस घर का डिजाइन हेल्पेज इंडिया के परामर्श से तैयार किया गया है, जो बुजुर्गों के लिए अनुकूल है। इस घर में भूतल से अलावा तीन मंजिले होंगी जिनमें रैम्प, लिफ्ट, बिजली, पानी की आपूर्ति तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध होगी।

मेनका ने बताया कि मंत्रालय को जब पता चला कि वृन्दावन की एक महिला (डॉ. लक्ष्मी गौतम) कई दशकों से हजारों विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं का अंतिम संस्कार करती आ रही हैं जो निराश्रित होने के चलते सड़क पर ही जिंदगी बिताती हैं और फिर वहीं मर जाने के लिए अभिशप्त हैं। उन्होंने बताया कि देश में आजादी के बाद से अब तक पहली बार ऐसी महिलाओं का भी सर्वे किया गया जो मानसिक रोगी न होने अथवा परिवार में रहने लायक होने के बावजूद भी पागलखानों में डाल दी गई हैं और वे वहां रहने के लिए विवश हैं। उनके परिजन संपत्ति एवं अन्य कई प्रकार के कारणों से उन्हें साथ नहीं रखना चाहते।

उन्होंने बताया कि इस आश्रय सदन में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर सुविधा दी जाएगी। यदि यहां रहने वाली महिलाएं किसी विशेष प्रशिक्षण की भी मांग करेंगी तो सरकार उसे मुहैया कराने का प्रयास करेगी। इस मौके पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सैयदा शादाब फातिमा ने बताया कि राज्य सरकार नए वित्त वर्ष से विधवा महिलाओं को दी जाने वाली मासिक सहायता राशि साढ़े पांच हजार कर दी है।

उन्होंने सभागार में उपस्थित विधवा एवं निराश्रित महिलाओं से आह्वान किया, ‘अगर उन्हें उनके पुत्रों ने ठुकरा दिया है, उन्हें भूलकर नई जिन्दगी शुरू करें। यह कृष्ण की धरती है। यहां महिला को जितना सम्मान मिला है उतना दुनिया में कहीं और नहीं मिला।’गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भी हाल ही में वृन्दावन प्रवास कर रहीं कई राज्यों की निराश्रित, परित्यक्त एवं विधवा महिलाओं के भत्ते को अब 550 रुपए महीने से बढ़ाकर 4050 रुपए कर दिया है।

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