Man in kerala Pathanamthitta district Erumeli town was eating sand people came together to help him - दो दिन से पेट में कुछ नहीं गया था तो भूख से बिलबिला कर रेत खाने लगा शख्‍स, लोगों ने की मदद - Jansatta
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दो दिन से पेट में कुछ नहीं गया था तो भूख से बिलबिला कर रेत खाने लगा शख्‍स, लोगों ने की मदद

लोगों ने जब देखा कि गुरुस्वामी रेत खा रहा है तो उसे तुरंत ही खाने के लिए भोजन दिया गया और उससे पूछताछ की गई। पूछताछ करने पर गुरुस्वामी ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि उसके पास थेणी जाने के लिए और भोजन के लिए पैसे नहीं हैं।

तस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

केरल में भूख से तड़पने का बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पथानामथिट्टा जिले के एरुमेली गांव में भूख से तड़पते शख्स ने पैसे के अभाव में रेत खानी शुरू कर दी थी। द न्यूज मिनट के मुताबिक शख्स को रेत खाता देख गांव के लोगों ने उसकी मदद की और उसके खाने के लिए भोजन की व्यवस्था की। रिपोर्ट्स के मुताबिक 52 वर्षीय गुरुस्वामी तमिलनाडु के थेणी जिले का रहने वाला था, वह काम के सिलसिले में अपने रिश्तेदारों के साथ सबरीमाला आया था, लेकिन वहां से उसके रिश्तेदारों ने उसे बिना पैसे दिए वापस भेज दिया। उसके पास जितने पैसे थे वह उससे बस करके एरुमेली गांव तक आ गया, लेकिन थेणी जाने के लिए उसके पास पैसे खत्म हो गए। वह दो दिन तक एरुमेली में बिना कुछ खाए रहा। दो दिन बाद जब उससे भूख सहन नहीं हुई तब वह रेत खाना शुरू कर दिया।

एरुमेली के एक निवासी पंचमी ने बताया, ‘मैं जिस आयुर्वेद की दुकान में काम करता हूं वहां एक पुलिया है। मैंने देखा कि एक शख्स वहां बैठा हुआ है और रेत खा रहा है। वह कागज के टुकड़े से रेत को हिला रहा है और कुछ रेत मुंह में डाल रहा है। बड़े टुकड़ों को, जिन्हें वह खा नहीं सका उसे थूकता जा रहा था। मुझे समझ नहीं आया कि वह क्या कर रहा है, इसलिए मैं ध्यान से उसे देखने लगा। उसके बाद मैं मेरे पड़ोसी दुकान के व्यक्ति के पास गया और हम दोनों साथ में उस शख्स के पास गए। हमने जो देखा उसे देखकर हम बहुत हैरान हो गए।’

लोगों ने जब देखा कि गुरुस्वामी रेत खा रहा है तो उसे तुरंत ही खाने के लिए भोजन दिया गया और उससे पूछताछ की गई। पूछताछ करने पर गुरुस्वामी ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि उसके पास थेणी जाने के लिए और भोजन के लिए पैसे नहीं हैं। पंचमी ने आगे बताया, ‘हम उसे तुरंत एख दुकान लेकर गए, वहां उसे बैठाया और खाने को दिया। में खुश हूं कि उसे इग्नोर करने के बजाय मैंने लोगों को उस शख्स के बारे में जानकारी दी।’ एरुमेली के अन्य निवासी श्याम ने बताया, ‘हमने कई बार उससे सवाल किया कि वह एरुमेली कैसे आया। हर बार उसने एक ही जवाब दिया। फिर हम समझ गए कि वह कोई मानसिक रोगी नहीं है, नहीं तो हर बार अलग-अलग जवाब देता।’ रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुस्वामी की कहानी सुनने के बाद लोगों ने उसे पैसे दिए ताकि वह घर जा सके। पुलिस को भी इस मामले की जानकारी दी, पुलिस भी वहां पहुंची और स्थानीय लोगों से पैसे जमा करके गुरुस्वामी को दिए गए, ताकि वह अपने घर जा सके। श्याम ने कहा, ‘हम यह नहीं कहेंगे कि हमने उसे काफी सारे पैसे दिए, लेकिन इतने पैसे दे दिए जिससे वह आराम से अपने घर जा सके।’

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