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असमः डिटेंशन कैंप में ‘विदेशी’ बुजुर्ग की मौत, परिजन बोले- भारतीय घोषित करें वरना नहीं लेंगे शव

दुलाल चंद्र के भतीजे साधन पॉल ने कहा, 'यदि वो विदेशी हैं तो हम शव कैसे ले सकते हैं? सारे कानूनी दस्तावेज उन्हें भारतीय बताते हैं, इसके बावजूद उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया।'

Author गुवाहाटी | Published on: October 16, 2019 12:42 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडियन एक्सप्रेस)

असम के सोनितपुर जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया। यहां विदेशी नागरिक घोषित किए गए एक 65 वर्षीय शख्स की अस्पताल में मौत हो गई। मृत घोषित किए जाने का बाद परिजनों ने उन्हें भारतीय घोषित किए जाने तक शव लेने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिले के ढेकियाजुली गांव के निवासी दुलाल चंद्र पॉल को दो साल पहले ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था, इसके बाद उन्हें तेजपुर के नजरबंद लोगों के साथ शिविर में रखा गया था। रविवार (13 अक्टूबर) को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में दुलाल चंद्र की मौत हो गई।

भतीजा बोला- विदेशी है तो शव कैसे लें: दुलाल चंद्र के भतीजे साधन पॉल ने कहा, ‘यदि वो विदेशी हैं तो हम शव कैसे ले सकते हैं? सारे कानूनी दस्तावेज उन्हें भारतीय बताते हैं, इसके बावजूद उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया।’ मंगलवार (15 अक्टूबर) को तेजपुर जेल के अधिकारियों ने परिजनों से कहा कि कागजी कार्यवाही पूरी करें ताकि उन्हें अंतिम संस्कार के लिए शव सौंपा जा सके। साधन बोले, ‘वो एक फॉर्म लेकर आए थे जिसमें मेरे अंकल का नाम लिखा हुआ था और साथ ही उन्हें विदेशी बताया गया था। लेकिन इसमें पते वाली जगह को खाली छोड़ दिया गया था। अफसर चाहते थे कि हम गवाह के तौर पर साइन कर दें और वो शव ले लें।’

मानसिक रूप से बीमार था मृतकः पॉल का शव जीएमसीएच में रविवार से ही रखा है और अफसर परिजनों को सौंपने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। परिजनों का कहना है कि पॉल को मानसिक बीमारी थी। उन्हें 27 सितंबर को तेजपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया था, जहां से जीएमसीएच रैफर कर दिया गया।

अब तक 26 की मौतः प्राप्त जानकारी के मुताबिक इन शिविरों में करीब 1000 लोग हैं, जिनमें से पॉल 26वें ऐसे विदेशी हैं जिनकी मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि तीन साल इन शिविरों में गुजार चुके लोगों को रिहा किया जाना चाहिए। 31 अगस्त को जारी हुई NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) की फाइनल लिस्ट में पॉल के किसी भी बेटे का नाम नहीं है। उन्हें भी 19 लाख लोगों की तरह खुद को भारतीय साबित करने के लिए याचिका लगानी पड़ी।

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