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ममता ने दी श्रद्धांजलि, कहा- नंदीग्राम के आंदोलनकारियों को याद कर रही हूं

उन्होंने लिखा, ‘‘ इस मौके पर हम नजरूल मंच में आयोजित एक समारोह में किसानों को ‘कृषक रत्न सम्मान’ से सम्मानित करेंगे। ’

Author March 14, 2017 5:31 PM
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान मारे गए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी (photo source – Indian express)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान मारे गए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि सरकार किसानों के अधिकारों की रक्षा करने को प्रतिबद्ध है। ममता ने ट्वीट किया, ‘‘ शर्मनाक घटना की 10वीं बरसी पर नंदीग्राम के आंदोलनकारियों को याद कर रही हूं। हम अपने किसानों की रक्षा करने को प्रतिबद्ध हैं। ’’

उन्होंने लिखा, ‘‘ इस मौके पर हम नजरूल मंच में आयोजित एक समारोह में किसानों को ‘कृषक रत्न सम्मान’ से सम्मानित करेंगे। ’’वर्ष 2007 में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में नंदीग्राम बंगाल भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का सबसे बड़ा स्थल रहा है। उस दौरान तत्कालीन सरकार ने इंडोनेशियाई सलीम समूह की मदद से नंदीग्राम में विशेष आर्थिक क्षेत्र :सेज: बनाने की कोशिश की थी जिसका ममता की अगुवाई में विरोध किया गया था।

बंगाल के सिंगुर और नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी जिस आंदोलन की लहर पर काबिज होकर ममता बनर्जी छह साल पहले बंगाल की सत्ता पर काबिज हुई थीं अब कोई एक दशक बाद वैसा ही एक आंदोलन उनके लिए सिरदर्द बन गया है। पावर ग्रिड कारपोरेशन आफ इंडिया के एक पावर सब-स्टेशन के लिए दक्षिण 24-परगना जिले में जमीन अधिग्रहण का विरोध करने वाले लोगों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष में मंगलवार शाम को दो लोगों की मौत हो गई। वहां कुछ जमीन का अधिग्रहण किया गया है और निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन गांव वाले अब इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि जमीन का समुचित मुआवजा नहीं मिला है और इस सब-स्टेशन से स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी पैदा होगा।

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14 मार्च 2007 को हुयी हिंसा के दौरान पुलिस की गोलीबारी में 14 किसानों के मारे जाने और कई के घायल होने के बाद इस आंदोलन की परिणति बंगाल में वाम मोर्चा के 34 साल लंबे शासन के अंत के तौर पर हुई थी।

बता दें अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का मर्म समझने वाली ममता बनर्जी ने इस आंदोलन के पीछे माओवादियों का हाथ होने का आरोप भी लगा चुकी हैं। दो साल पहले ममता ने कहा था कि  जरूरत पड़ने पर इस परियोजना की जगह बदली जा सकती है। ममता के मुताबिक, इलाके में जबरन जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि जरूरत पड़ने पर उस बिजली उप-केंद्र को कहीं और स्थानांतरित किया जा सकता थी। मुख्यमंत्री ने कल की हिंसा की जांच सीआईडी को सौंप दी थी।

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