दिल्ली के मालवीय नगर में 3 जून को हुए हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई थी। इस अग्निकांड की जांच में यह सामने आया है कि ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) पॉलिसी के तहत चल रहे होटल को एक बड़े होटल में बदल दिया गया। 3 मई, 2024 को दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग ने इस होटल को बी एंड बी के रूप में चलाने के लिए लाइसेंस जारी किया था।
यह लाइसेंस 3 साल के लिए था और बेड एंड ब्रेकफास्ट एक्ट के मुताबिक विभाग को इस दौरान होटल का निरीक्षण करने की जरूरत नहीं थी।
सूत्रों के मुताबिक, ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट एक्ट की इस खामी का फायदा होटल के मालिक ने उठाया और इसे 26 कमरों वाले होटल में बदल दिया गया। होटल में लगी आग में मरने वाले 23 लोगों में 14 विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
दिल्ली सरकार का कहना है कि हालांकि पर्यटन विभाग के लिए 3 साल तक होटल का निरीक्षण करना जरूरी नहीं था लेकिन अगर किसी सरकारी एजेंसी ने नियमों के उल्लंघन की सूचना दी होती या किसी तरह की आशंका जताई होती तो पर्यटन विभाग जरूर दखल देता।
दस्तावेजों को देखने से पता चलता है कि मई, 2024 के बाद से किसी भी सरकारी एजेंसी ने इस बारे में पर्यटन विभाग को नहीं बताया। इसमें दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) भी शामिल है। एमसीडी हर साल स्वास्थ्य और व्यापार लाइसेंस के रिन्यू के वक्त उस संपत्ति का निरीक्षण करता है।
बिजली और जल विभाग ने नहीं दिया ध्यान
हैरान करने वाली बात है कि बिजली और जल विभाग ने 6 कमरों की मंजूरी वाले इस ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट स्टे में बिजली और पानी की खपत पर ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा लोकल पुलिस भी समय-समय पर होटल में आने वाले लोगों का रिकॉर्ड चेक करती है, विशेषकर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस से पहले ऐसा जरूर किया जाता है।
सूत्रों ने बताया कि, सुरक्षा कारणों की वजह से ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट नीति के तहत होटल चलाने वालों के लिए यह जरूरी होता है कि वह फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस को उनके होटल में ठहरने वाले विदेशी लोगों के बारे में समय-समय पर बताए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
6 साल के लिए जय मिश्रा को लीज पर दी संपत्ति
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इस होटल के मालिक लवकेश बजाज ने पर्यटन विभाग को लाइसेंस लेते समय बताया था कि उन्होंने यह संपत्ति अपने अकाउंटेंट जय मिश्रा को 6 साल के लिए लीज पर दी है।
ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट एक्ट के नियम कहते हैं कि अगर किसी संपत्ति को 3 साल से ज्यादा वक्त के लिए पट्टे पर दिया जाता है तो लाइसेंस जारी करने वाला विभाग जिस शख्स को संपत्ति को पट्टे पर दिया गया है, उसे ही मालिक मान लेता है। लाइसेंस के आवेदन में भी यह कहा गया था कि जय मिश्रा ही इस संपत्ति में रहेंगे।
जांच में पता चला है कि पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक सहित तीन अधिकारियों ने लाइसेंस जारी करने से पहले इस होटल का निरीक्षण किया था। उन्होंने देखा था कि जय मिश्रा वहीं रहते हैं और पहले और दूसरी मंजिल पर तीन-तीन कमरे हैं। उस वक्त इस तीन मंजिला इमारत में कुल 10 कमरे थे।
तीन फ्लोर और 20 नए कमरे बना दिए
लाइसेंस की वैधता मई, 2027 तक थी लेकिन बड़ी बात यह है कि लाइसेंस मिलने के बाद इस बिल्डिंग में तीन और फ्लोर और 20 नए कमरे बना दिए गए। बेसमेंट में एक रसोई चालू कर दी गई जबकि एमसीडी ने इजाजत दी थी कि वहां पर सिर्फ चाय और नाश्ता ही परोसा जा सकता है।
पर्यटन विभाग ने होटल के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की कॉपी दिल्ली पुलिस, एमसीडी, दिल्ली जल बोर्ड, BSES यमुना पावर लिमिटेड, दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) और इंडिया टूरिज्म सहित कई विभागों को भेजी थीं। इसमें से किसी भी ने पर्यटन विभाग को यह नहीं बताया कि यह संपत्ति बी एंड बी के बजाय होटल के रूप में चलाई जा रही थी।
सबसे पहले आग रसोई में लगी
पुलिस की जांच में पता चला है कि आग सबसे पहले रसोई में लगी और उस वक्त शेफ केशव नेगी ने तेल गर्म करने के लिए स्टोव चालू किया था। एक पुलिस अफसर ने बताया, “तेल ज्यादा गर्म हो गया और उससे निकलने वाला धुआं खाना बनाने वाली जगह के पीछे लगे प्लास्टिक पैनलों के संपर्क में आ गया। इससे आग लग गई और तेजी से पूरी इमारत में फैल गई।”
पुलिस के अनुसार, केशव नेगी ने आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन आग भड़क गई और वह वहां से भाग गए। उस दौरान, रिसेप्शनिस्ट, एक सफाईकर्मी और दो हाउसकीपिंग कर्मचारी ही वहां पर थे। रिसेप्शनिस्ट ने ही लवकेश बजाज को आग लगने के बारे में बताया। चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस फाइनल फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
मालवीय नगर अग्निकांड का जिम्मेदार आखिर कौन?
मालवीय नगर के होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। एक बार फिर इस घटना ने राजधानी दिल्ली के लचर नागरिक प्रशासन और सुरक्षा इंतजामों की पोल एक बार फिर खोल दी है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
