कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी में हुई रैली के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास विवादों में है। इस संगठन में विश्व हिंदू परिषद के पुराने पदाधिकारी, बीपीओ कर्मचारी और बीकॉम ग्रैजुएट भी शामिल हैं। श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास औपचारिक रूप से 2026 की शुरुआत में ही रजिस्टर्ड न्यास है और इसके पदाधिकारी एक स्वयंसेवी संगठन बताते हैं। इसके सचिव रामजी अवस्थी बताते हैं कि संगठन के लगभग सात रजिस्टर्ड सदस्य और पदाधिकारी, 11 एक्टिव वर्कर और लगभग 45 स्वयंसेवक हैं। रामजी अवस्थी कहते हैं कि न्यास अपने फाइनेंस के लिए सदस्यों के योगदान और दान पर निर्भर है।

संगठन किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़ाव से इनकार करता है, और इसके मुख्य कामों में ‘गाय एम्बुलेंस’ चलाना और हर साल लगभग पांच से दस छात्रों की पढ़ाई के लिए फंडिंग करना शामिल है। इंडियन एक्सप्रेस ने न्यास के सात में से पांच पदाधिकारियों का पता लगाया। संगठन ने बाकी दो लोगों की डिटेल्स शेयर करने से मना कर दिया, यह कहते हुए कि वे मीडिया से बात नहीं करना चाहते। 42 साल के रामजी अवस्थी 2018-19 में VHP के ज़िला ‘सेवा प्रमुख’ हुआ करते थे। MBA ग्रेजुएट रामजी अवस्थी ने दिल्ली में मार्केटिंग में काम किया था। उनका कहना है कि अब वे हल्द्वानी में अपना बिज़नेस चलाते हैं।

VHP में भी काम कर चुके हैं पदाधिकारी

रामजी अवस्थी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “न्यास में शामिल होने से पहले मैंने कुछ साल VHP में काम किया। हम लोगों की भलाई के लिए काम करते हैं और किसी संगठन या राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं हैं।”

न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे भी 42 साल के हैं और एक बिज़नेसमैन हैं। हल्द्वानी के रहने वाले गिरीश का कहना है कि उनके पास कंप्यूटर एप्लीकेशन में बैचलर डिग्री है और उन्होंने कुछ साल दिल्ली में BPO सेक्टर में काम किया है। गिरीश पांडे कहते हैं कि श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास शुरू करने का आइडिया उन्हें कोविड के दौरान आया और इसका कारण जानवरों, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों की चिंता थी। लेकिन सबसे बड़ा सिद्धांत यह है कि हम जो भी करेंगे, हम हिंदू हितों के लिए काम करेंगे।

‘हमें नहीं पता था कि खड़गे जी किस जाति के हैं’

राजनीतिक जुड़ाव के बारे में गिरीश पांडे कहते हैं, “मैं किसे वोट देता हूं, यह मेरा अधिकार है कि मैं इसे सीक्रेट रखूं। मेरी किसी पार्टी या संगठन के प्रति कोई सीधी ज़िम्मेदारी नहीं है। हमें यह भी नहीं पता था कि खड़गे जी किस जाति के हैं। संगठन लोगों से उनकी जाति नहीं पूछता और हमारे मेंबर अलग-अलग तबके से हैं। मैंने खुद 9 अगस्त को (जहां रैली हुई थी) ज़मीन पर झाड़ू और पोछा लगाया और बाद में सभी सदस्य एक साथ बैठे। हमारा एकमात्र मकसद उस जगह को साफ करना था। राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत करने वाले अमित ने भी (शुद्धिकरण) रस्म में हिस्सा लिया।”

न्यास के एक मेंबर अमित कुमार दलित वाल्मीकि कम्युनिटी से हैं। उन्होंने शुद्धिकरण की आलोचना करने पर राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। इंडियन एक्सप्रेस ने अमित कुमार से बात करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। न्यास का एक और जाना-माना चेहरा 45 साल की लता पंत हैं, जो इसकी प्रवक्ता हैं। कुमाऊँ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट और अभी सोशल वर्क में मास्टर्स कर रही लता पंत आस-पास के गांवों में बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही हैं।

लता पंत कहती हैं कि न्यास के आइडिया पर लंबे समय से चर्चा हो रही थी, उन लोगों के बीच जो लोकल लेवल पर सोशल वर्क और गैदरिंग के ज़रिए एक-दूसरे को जानते थे। वह कहती हैं, “हमारा किसी पार्टी या संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। हम नॉर्मल परिवारों के नॉर्मल लोग हैं जिनके सपने हैं।”

न्यास के कोषाध्यक्ष 43 साल के नरेंद्र नेगी कहते हैं कि उनके पास बैचलर्स ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन्स की डिग्री है और 2021 तक उन्होंने चंडीगढ़ की एक फर्म के ह्यूमन रिसोर्स सेक्शन में काम किया। नरेंद्र नेगी कहते हैं, “अपने होमटाउन हल्द्वानी लौटने के बाद मैंने ह्यूमन रिसोर्स के सेक्टर में अपना बिज़नेस शुरू किया। मैं अपने काम के साथ न्यास की ज़िम्मेदारियों को बैलेंस करता हूं। यह संगठन उन लोगों के एक इनफॉर्मल नेटवर्क से बना है जो पहले से ही छोटे-छोटे तरीकों से दूसरों की मदद कर रहे थे। गिरीश जी (अध्यक्ष) और मैं कॉलेज में साथ थे। दूसरे सदस्य भी हल्द्वानी से हैं और हम एक-दूसरे को जानते हैं। हम लोगों की मदद करने के लिए न्यास शुरू करने के लिए साथ आए।”

संगठन का बीजेपी से नहीं है संबंध

बीजेपी, VHP या RSS से किसी भी पर्सनल या संगठन लिंक से इनकार करते हुए नरेंद्र नेगी कहते हैं, “आज तक अगर मैं बोलता हूं, तो अपने लिए बोलता हूं।” वह आगे कहते हैं कि न्यास पहला संगठन है जिसका वह हिस्सा रहे हैं।

पदाधिकारियों में सबसे कम उम्र के 25 साल के विजय फर्त्याल हैं, जो असल में अल्मोड़ा के रहने वाले हैं लेकिन अब हल्द्वानी में रहते हैं। वह और उनके चचेरे भाई परिवार की मोबाइल की दुकान चलाते हैं।

बीकॉम ग्रेजुएट विजय फर्त्याल का कहना है कि वह गिरीश पांडे से मिलने के बाद पांच-छह महीने पहले न्यास में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, “एक दिन भाई (गिरीश) और मैं मिले, और मुझे लगा कि वह अच्छा काम कर रहे हैं, समाज के लिए कर रहे हैं, छोटी-छोटी चीजें कर रहे हैं। बाद में उन्होंने एक-दूसरे को नंबर दिए और वह न्यास के लिए साइन हो गए।”

विजय फर्त्याल कहते हैं कि शुद्धिकरण पर फोकस गलत था, वह न्यास की दूसरी गतिविधियों जैसे शादी की ज़रूरी चीज़ों जैसे प्लेट और गिलास पर सब्सिडी देना या देना, त्योहारों पर सामूहिक खाना ऑर्गनाइज़ करना, एम्बुलेंस सर्विस चलाना और बच्चों को कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी में मदद करने का प्लान के बारे में बात कर रहे थे।

विजय किसी भी राजनीतिक पार्टी से लिंक होने से भी इनकार करते हैं, और कहते हैं कि न्यास को अपना फंड समाज से मिलता है। विजय फर्तियाल कहते हैं कि वह अपनी मास्टर्स पूरी करना चाहते हैं और अपने फ़ैमिली बिज़नेस को बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन उनका मकसद आखिर में एक अच्छा इंसान बनना और सेवा करना है। उन्होंने कहा कि बाकी, भगवान मुझे जहां भी ले जाना चाहें।

कैसे शुरू हुआ मामला?

यह मामला एक WhatsApp मैसेज से शुरू हुआ। 8 अगस्त को खड़गे की रैली के एक दिन बाद न्यास के एक ग्रुप में एक मैसेज आया, जिसकी शुरुआत जय श्री राम से हुई और आगे बताया गया कि रामलीला मैदान कैसे पवित्र है और हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों के लिए है। मैसेज में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस की सभा ने हिंदुओं की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंचाई क्योंकि हिंदू मान्यताओं के खिलाफ नारे लगाए गए, जबकि विधर्मियों (दूसरे धर्म के लोग) की मौजूदगी ने जगह की पवित्रता को भंग किया।

इसके बाद घोषणा हुई, “अगली सुबह 11 बजे, न्यास जगह की पवित्रता को वापस लाने के लिए ‘शुद्धि यज्ञ (शुद्धिकरण प्रार्थना)’ करेगा, जिसमें लोगों से इकट्ठा होकर आहुति देने के लिए कहा जाएगा। अगले दिन मैदान साफ किया गया और हवन किया गया।”

राहुल के खिलाफ दर्ज FIR

कांग्रेस ने इस रस्म को दलित नेता खड़गे के खिलाफ बीजेपी शासित उत्तराखंड में जातिगत भेदभाव का एक उदाहरण बताया है। 29 अगस्त को राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शुद्धिकरण छुआछूत का काम है और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की।

अगले दिन अमित कुमार ने राहुल गांधी के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई, जिसमें उन पर दलितों को बदनाम करने का आरोप लगाया गया। अमित कुमार ने दावा किया कि खड़गे की रैली के बाद, रामलीला मैदान में बड़ी मात्रा में कचरा और खाली शराब की बोतलें मिलीं, जिनमें से कुछ में बहुत आपत्तिजनक/अशुद्ध सामग्री थी। उन्होंने सोशल मीडिया वीडियो का भी हवाला दिया, जिसमें रैली में आपत्तिजनक और पहली नज़र में जिहादी नारे दिखाए गए थे।

अमित कुमार ने कहा कि इसलिए मैदान को साफ किया गया और इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता को बहाल करने के लिए हवन किया गया।उन्होंने FIR में कहा कि इसका मल्लिकार्जुन खड़गे या किसी अन्य व्यक्ति की जाति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह, एक वाल्मीकि हैं और शुद्धिकरण का हिस्सा थे।

कांग्रेस ने दर्ज कराई थी शिकायत

31 अगस्त को कांग्रेस ने गिरीश पांडे और 15 अनजान लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन पर अपमानजनक और निंदनीय शुद्धिकरण करने के लिए आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने अभी तक इस शिकायत पर ध्यान नहीं दिया है।

हल्द्वानी कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मिलीभगत बिल्कुल साफ है। पुलिस में की गई कांग्रेस की शिकायत स्वीकार नहीं की गई, लेकिन राहुल गांधी के खिलाफ आसानी से FIR दर्ज कर दी गई।”

पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR या न्यास के खिलाफ कार्रवाई की कांग्रेस की मांग के बारे में बात करने से इनकार कर दिया। उत्तराखंड के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हम राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR की जांच के शुरुआती स्टेज में हैं। अलग-अलग कांग्रेस सदस्यों ने अलग-अलग फॉर्मेट में शिकायतें दी हैं। हम कानूनी नजरिए से उनकी जांच कर रहे हैं।”

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता भाजपा पर लगातार राजनीतिक हमले कर रहे हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।