मालेगांव महानगरपालिका में महापौर और उपमहापौर के चुनाव से पहले एक दुर्लभ राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने मिलकर एक नया मोर्चा गठित किया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के तीन और भाजपा के दो पार्षदों ने मिलकर ‘भारत विकास आघाड़ी’ नाम से एक स्वतंत्र समूह बनाया है,

‘भारत विकास आघाड़ी’ के सामने आने से 84 सदस्यीय महानगरपालिका में सत्ता संतुलन के समीकरण बदल सकते हैं। मौजूदा स्थिति में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, नए मोर्चे का नेतृत्व कांग्रेस पार्षद एजाज बेग करेंगे। हालांकि, मालेगांव महानगरपालिका चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं लेकिन महापौर और उपमहापौर का चुनाव अभी होना बाकी है। ऐसे में नवगठित मोर्चा आगामी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि ‘भारत विकास आघाड़ी’ महापौर और उपमहापौर चुनाव में किसे समर्थन देती है और मालेगांव की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगती है।

मालेगांव नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर इस्लाम पार्टी सामने आई

मालेगांव नगर निगम में 84 सीटें हैं ऐसे में बहुमत के लिए 43 सीटों की जरूरत होगी। मेयर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। सीटों का गणित कुछ ऐसा है कि मालेगांव नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर इस्लाम पार्टी सामने आई, जिसके पास 35 सीटें है। एआईएमआईएम के पास 21 सीटें, एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास 18 सीटें, समाजवादी पार्टी के पास 5 सीटें, कांग्रेस के पास 3 सीटें और भाजपा के पास 2 सीटें है। ऐसे में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद इस्लाम पार्टी को मेयर बनाने के लिए दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत होगी।

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वहीं, दूसरी ओर एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने दावा किया है कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मालेगांव समेत कुछ नगर निगमों में एआईएमआईएम से समर्थन मांगा था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हमारी पार्टी न तो भाजपा और न ही शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मालेगांव में शिंदे गुट को किसी भी हालत में समर्थन नहीं दिया जाएगा।

(भाषा के इनपुट के साथ)