Making pakodas for two years, a restaurant can be opend by the third year and And in 4-5-6 years a hotel too, says Governor Anandiben Patel - पीएम मोदी की 'पकौड़ा थ्योरी' को गवर्नर ने यूं समझाया- 2 साल बाद रेस्टोरेंट, 4-5-6 साल बाद खोल लोगे होटल - Jansatta
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पीएम मोदी की ‘पकौड़ा थ्योरी’ को गवर्नर ने यूं समझाया- 2 साल बाद रेस्टोरेंट, 4-5-6 साल बाद खोल लोगे होटल

गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश की मौजूदा राज्यपाल 76 वर्षीय आनंदीबेन पटेल ने पकौड़ा को लेकर हो रही सियासत पर अपनी बात रखी है। उन्होंने पीएम मोदी के पकौड़ा को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया है।

मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। (फाइल फोटो)

गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश की मौजूदा राज्यपाल 76 वर्षीय आनंदीबेन पटेल ने पकौड़ा को लेकर हो रही सियासत पर अपनी बात रखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पकौड़ा को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया है। आनंदीबेन ने कहा है कि पकौड़ा बनाकर दो साल में रेस्टोरेंट और 4-5-6 साल में होटल खड़ा किया जा सकता है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक आनंदीबेन ने कहा है कि विपक्ष प्रधानमंत्री के उस बयान को गलत तरीके से पेश कर रहा है, जिसमें उन्होंने किसी शख्स के द्वारा पकौड़ा बेचकर 200 रुपये कमाने को रोजगार से जोड़कर बताया था। उन्होंने कहा कि पकौड़ा बनाना भी एक कौशल है, जो एक समृद्ध व्यापार की नींव का पत्थर साबित हो सकता है। आनंदीबेन ने कहा- ”आप लोगों ने जरूर देखा होगा कि लोकसभा में इस बारे में चर्चा चल रही थी। अगर प्रधानमंत्री कहीं जाते हैं, वहां प्रदर्शन होने लगते हैं। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि लोगों ने पकौड़ा दिखाकर प्रदर्शन क्यों किया, क्या पढ़े-लिखे लोग भी पकौड़ा बनाने जा रहे हैं?”ॉ

आनंदीबेन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 300 किमी दूर, छिंदवाड़ा जिले में गोंड महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रही थीं। उन्होंने आगे कहा- ”आज मैं आपको बताऊंगी कि पकौड़ा बनाना एक कौशल है। अगर आप अच्छे और स्वादिष्ट पकौड़े नहीं बनाएंगे तो आपको ग्राहक नहीं मिलेंगे।” आनंदीबेन ने आदिवासी इलाके में लोगों को संबोधित करते हुए कहा- ”यह मत सोचो के यह अच्छा व्यवसाय नहीं है। अगर कोई व्यक्ति दो साल पकौड़े बनाता है तो तीसरे वर्ष वह रेस्टोरेंट खोल सकता है। उसका खुद का रेस्टोरेंट। और 4-5-6 वर्षों में होटल भी शुरू किया जा सकता है।”

बता दें कि पिछले दिनों एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के कार्यकाल में रोजगारों के अवसर पैदा करने के सवाल पर कहा था कि अगर स्टूडियों के बाहर कोई शख्स पकौड़ा बेचकर रोज 300 रुपये बचाकर शाम को घर ले जाता है तो क्या उसे रोजगार में नहीं माना जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने पीएम मोदी की बात का पलटवार करते हुए ट्वीट किया था कि अगर पकौड़ा बेचना रोजगार है तो क्या भीख मांगने को रोजगार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए? प्रधानमंत्री के बयान पर फिलहाल देश के कई हिस्सों में सियासत गरमा चुकी है। लोग पकौड़ा बेचकर या उन्हें तलकर प्रदर्शन कर रहे हैं। संसद में भी इस मुद्दे पर हो होहल्ला हो चुका है।

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