मुंबई के एक होटल कारोबारी के पास अहिल्यानगर पुलिस का फोन आया, जिससे वे हैरान रह गए। पुलिस ने बताया कि उनके और उनकी पत्नी के नाम पर 4 बैंक खाते खुले हुए हैं, जिनमें 2.43 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ है। लेकिन कारोबारी का कहना है कि उन्होंने ये खाते कभी खोले ही नहीं और वे उस क्रेडिट सोसाइटी को भी नहीं जानते, जहां ये खाते बनाए गए हैं।
होटल कारोबारी का कहना है कि उन्होंने अपने दस्तावेज एक “दर्शन बुकिंग” के लिए अशोककुमार एकनाथ खरात नाम के एक कथित बाबा को दिए थे। अब उन्हें शक है कि उन्हीं दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके उनके नाम से बैंक खाते खोल दिए गए। उन्होंने कहा कि वे लोग खरात के पास आध्यात्मिक इलाज और दर्शन के लिए गए थे।
पुलिस को शक – कई और लोगों को फंसाया गया होगा
जांच एजेंसियों को शक है कि ऐसे कई और लोग भी इस तरह फंसाए गए हैं और उनके नाम पर बैंक खाते खोलकर पैसे घुमाए गए हैं। यह जांच पहले सिर्फ यौन शोषण, धोखाधड़ी, वसूली और अंधश्रद्धा विरोधी कानून के तहत चल रही थी, लेकिन अब इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी जुड़ गया है और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) भी जांच कर रहा है।
पुलिस को अब तक ऐसे 130 से ज्यादा बैंक खातों का पता चला है, जो लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके खोले गए थे। इन खातों में 2021 से 2024 के बीच कुल 63 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ है। कई खातों में खरात को नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) भी दिखाया गया है और कई जगह उनका मोबाइल नंबर भी इस्तेमाल हुआ है।
जांच में यह भी सामने आया है कि लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो जैसे दस्तावेज लेकर ये खाते खोले जाते थे। लोग जब खरात से मिलने या भविष्यवाणी और सलाह लेने जाते थे, तब उनसे ये कागज लिए जाते थे और बाद में उन्हीं के नाम पर बैंक अकाउंट बना दिए जाते थे।
इनमें से ज्यादातर खाते दो सहकारी संस्थाओं – जगदंबा को – ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी और समता नागरी सहकारी पत संस्था — में खोले गए थे। दोनों संस्थाएं खरात और उनके सहयोगियों से जुड़ी बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खरात 2024 तक जगदंबा संस्था के चेयरमैन भी थे। वहीं समता संस्था उनके सहयोगी और सह-आरोपी अरविंद पांडुरंग बावके से जुड़ी है। बताया गया है कि ज्यादातर लेन-देन इन्हीं के कार्यकाल में हुए। जांच में यह भी पता चला है कि कई बार एक ही व्यक्ति के नाम पर कई खाते खोले गए और वे सभी बहुत कम समय में बनाए गए थे।
अहिल्यानगर के पुलिस अधीक्षक सोमनाथ घार्गे ने बताया कि अब तक 20 खाताधारकों के बयान लिए गए हैं। सभी ने कहा है कि उनके नाम से बिना अनुमति के खाते खोले गए थे। अब इन खातों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। खुद को भगवान बताने वाले अशोक खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।
एक महिला, जिसने खरात पर यौन शोषण और जबरन गर्भपात का आरोप लगाया है, उसने यह भी बताया कि उसके और उसके परिवार के दस्तावेजों का इस्तेमाल क्रेडिट सोसाइटी से जुड़े कामों में किया गया। आरोप है कि विरोध करने के बावजूद उससे कई दस्तावेजों पर साइन करवाए गए।
एक अन्य शिकायत जमीन विवाद से जुड़ी है। रिकॉर्ड के अनुसार, खरात “श्री व्यंकटेश फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड” नाम की कंपनी के डायरेक्टर भी हैं, जो दिसंबर 2021 में बनी थी। मार्च 2024 में इस कंपनी को सरकारी एजेंसी NAFED के जरिए MSP पर फसल खरीदने के लिए राज्य स्तरीय एजेंसी के रूप में मान्यता मिली थी। एक किसान ने आरोप लगाया है कि फसल खरीद के बाद उसे भुगतान नहीं मिला। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि इन बैंक खातों में दिख रहे पैसों का इस कंपनी से कोई संबंध है या नहीं।
इसके अलावा “ब्राइट स्पार्क्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड” नाम की एक और कंपनी 2024 में बनी थी, जिसमें वही लोग जुड़े हैं जो इस पूरे नेटवर्क में शामिल बताए जा रहे हैं। इस मामले में सह-आरोपी अरविंद बावके ने बताया था कि वे सरकारी ठेके पाने की योजना बना रहे थे और सारे दस्तावेज और निवेश खरात ही संभाल रहे थे। उनके अनुसार, खरात ने कहा था कि दो साल बाद उन्हें सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिलने लगेंगे।
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सबरीमला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण अवलोकन किया कि वह किसी धर्म में कौन सी प्रथा अंधविश्वास है, यह तय करने का अधिकार और अधिकार क्षेत्र रखता है। नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने परिवर्तनकारी संवैधानिकता और संवैधानिक नैतिकता जैसे सिद्धांतों के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक नैतिकता को न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह अवधारणा स्पष्ट नहीं है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
