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अयोध्या मामले के मुख्य वादी इकबाल अंसारी रिव्यू पिटीशन के खिलाफ, फैसले से संतुष्ट

उच्चतम न्यायालय ने नौ नवंबर को बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में अपने फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ विवादित जमीन राम लला को सौंपी जानी चाहिए, जो तीन वादियों में से एक हैं।

Author अयोध्या | Updated: November 17, 2019 10:51 PM
अयोध्या भूमि विवाद मामले के मुख्य वादी इकबाल अंसारी

अयोध्या भूमि विवाद मामले के मुख्य वादी इकबाल अंसारी ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुर्निवचार याचिका दाखिल करने की आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की योजना से रविवार को दूरी बनाई। गत नौ नवंबर को उच्चतम न्यायालय का फैसला आते ही अंसारी ने कहा था कि वह फैसले पर पुर्निवचार की मांग नहीं करेंगे। एआईएमपीएलबी ने शीर्ष अदालत में इस मामले में पुर्निवचार याचिका दाखिल करने का रविवार को फैसला किया। इसके कुछ ही समय बाद अंसारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘पुर्निवचार की मांग करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि नतीजा यही रहेगा।

यह कदम सौहार्दपूर्ण वातावरण को भी बिगाड़ेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरी राय बोर्ड के विचारों से अलग है और मैं इसी समय मंदिर-मस्जिद मुद्दे को समाप्त करना चाहता हूं।’’ बोर्ड ने रविवार को पुर्निवचार याचिका दाखिल करने का फैसला करते हुए कहा कि वह मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन लेने के खिलाफ है।

एआईएमपीएलबी के सचिव जफरयाब जिलानी ने लखनऊ में बोर्ड की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘मस्जिद अल्ला की है और शरिया के तहत इसे किसी और को नहीं दिया जा सकता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बोर्ड ने साफ कहा है कि वह मस्जिद की जगह अयोध्या में पांच एकड़ जमीन लेने के खिलाफ है। बोर्ड की राय है कि मस्जिद का कोई विकल्प नहीं हो सकता।’’

उच्चतम न्यायालय ने नौ नवंबर को बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में अपने फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ विवादित जमीन राम लला को सौंपी जानी चाहिए, जो तीन वादियों में से एक हैं। पांच न्यायाधीशों की पीठ ने केंद्र सरकार को यह निर्देश भी दिया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन दी जाए।

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