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महाराष्ट्र: फसल के लिए पानी नहीं और कुएं भी सूख गए, 43 डिग्री की भीषण गर्मी में भूख हड़ताल पर बैठे लोग

चकलांबा की कहानी मराठवाड़ा के इस हिस्से के दर्जनों गांवों की वास्तविकताओं को दर्शाती है, जहां भूजल की कमी ने खतरनाक स्तर तक पहुंच गई।

Author नई दिल्ली | June 20, 2019 9:00 AM
मराठवाड़ा के बीड में डैम साइट। (Express photo: Amit Chakravarty)

महाराष्ट्र के बीड जिले में चकलांबा गांव के निवासी पानी की भयंकर कमी के चलते 43 डिग्री तापमान में भूख हड़ताल पर चले गए हैं। ग्रामीण गांव के बाहरी इलाके में एक तंबू के नीचे बैठे हैं, उनके पीछे एक बैनर भी लगा है जिसमें उन्होंने प्रशासन से उनकी कुछ मांगे पूरी करने को कहा है। पिछले छह महीनों में ऐसा दूसरी बार है जब ग्रामीण भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने इससे पहले फरवरी में 12 दिनों की भूख हड़ताल भी की थी। मामले में 70 साल के मछिंद्रा गावडे ने लगभग रोते हुए कहा, ‘यहां का हर एक कुंआ सूख गया है। फसल के लिए पानी का एक भी स्त्रोत नहीं है। अगर हमें प्रर्याप्त बारिश नहीं मिली तो इस साल खरीफ फसल की बुआई नहीं कर पाएंगे।’ पानी की कमी के चलते चकलांबा गांव के निवासियों ने साल 2016 से प्रदेश सरकार के चल संसाधन विभाग में कई बार याचिका दायर की।

चकलांबा गांव के भू-स्वामियों में से एक सतीश पाटिल ने बताया, ‘एक उप-नहर हमारी सभी समस्याओं का समाधान करेगी।’ सतीश वर्तमान में एक सरकारी कंपनी में अस्थाई कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। पाटिल के पास अभी भी 16 एकड़ जमीन है मगर साल 201-19 में उनकी अधिकांश फसल खराब हो गई और आने वाले सीजन में खरीफ फसल के लिए सारी रद्द कर रहे हैं।

चकलांबा की कहानी मराठवाड़ा के इस हिस्से के दर्जनों गांवों की वास्तविकताओं को दर्शाती है, जहां भूजल की कमी ने खतरनाक स्तर तक पहुंच गई। यहां आधे से अधिक गांव जहां राज्य भूजल सर्वेक्षण और विकास एजेंसी के ग्रीष्मकालीन सर्वेक्षण में पाया गया कि पांच साल के औसत से 3 मीटर से अधिक की कमी मराठवाड़ा या 1,467 गांवों में है। इन गांवों की सबसे बड़ी सघनता बीड, उस्मानाबाद और औरंगाबाद जिलों में है। यहां के कुएं और बोरवेल अब सूख चुके हैं।

ऐसे में चकलांबा के ग्रामीणों ने प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों से मिलने के लिए मुंबई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना बनाई, मगर पैसों कमी के चलते उन्हें आखिर में एक ही दूत भेजना पड़ा।

मुंबई में अब विधायकों का ध्यान अपने गांव की समस्याओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हुए कृष्ण खेड़कर ने कहा, ‘सरकार यह कहना पसंद करती है कि हम शराबी हैं और नशेड़ी खुद को मार रहे हैं। मगर सच्चाई यह कि हमारे पास ना तो हमारे खेते के लिए पानी है और ना ही आय का कोई वैकल्पिक स्त्रोत है।’ उन्होंने कहा कि बार-बार के नुकसान के बाद तो कई लोग उम्मीद ही छोड़ देते हैं।

खेडकर ने महाराष्ट्र के उच्च सदन में विपक्ष के नेता (एनसीपी) धनंजय मुंडे से मुलाकात की, जिन्होंने उनके को मजबूत करने का वादा किया। खेड़कर को प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस से भी मिलने की उम्मीद है।

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