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पंकजा मुंडे के मंत्रालय ने नियमों को ताक पर रख बांटे थे, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए 6300 करोड़ के ठेके

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि टेंडर जारी करने की प्रक्रिया में धांधली हुई। कोर्ट के इस फैसले की वजह से चुनावी माहौल में बीजेपी और खासकर पंकजा मुंडे को काफी फजीहत झेलनी पड़ सकती है।

Author Updated: March 9, 2019 1:50 PM
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सबसे ज्यादा झटका पंकजा मुंडे को लगा है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो/Narendra Vaskar

महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस सरकार को सुप्रीम कोर्ट से एक तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने 6,300 करोड़ रुपये के पोषण आहार ठेका रद्द कर दिए हैं। यह ठेका 2016 में पंकजा मुंडे के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से जारी किया गया था। इसके तहत स्कूलों में बच्चों को पोषक आहार उपलब्ध कराए जाने थे। लेकिन, कोर्ट ने पाया कि इस ठेके में अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन किया गया। गौरतलब है कि चुनावी माहौल में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बीजेपी के लिए मुसीबत बन सकती है। कोर्ट के मुताबिक ठेका जारी करने के संबंध में जरूरी शर्तों का पालन नहीं किया गया और इसे महिलाओं के स्वयं सहायता समूह के बजाय बड़े उद्योगपतियों की झोली में डालने का काम किया गया।

अदालत के इस फैसले से व्यक्तिगत रूप से महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे को सबसे बड़ा झटका लगा है। पंकजा मुंडे के खिलाफ खाद्य-सामग्री में घोटाले का आरोप विपक्ष पहले से ही लगाता आ रहा है। हालांकि, प्रदेश के सीएम विपक्ष के हमले का बचाव करते रहे हैं और किसी भी तरह के घोटाले की बात को खारिज करते हैं। गौरतलब है कि मुंडे के मंत्रालय ने कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद 8 मार्च, 2016 को टेंडर जारी किया। यह टेंडर महिलाओं द्वारा संचिलात स्वयं सहायता समूह को ही दिया जाना था। लेकिन, इस दौरान महिलाओं के नाम पर अन्य लोग लाभ उठाने लगे। पहले यह ठेका 5 साल के लिए जारी किया गया, जिसे अगले दो साल तक बढ़ाया भी जा सकता था। इस ठेके की कुल अनुमानित लागत 6,300 करोड़ रुपये आंकी गई।

मामले में याचिकाकर्ता वैष्णोरानी महिला बच्चा गेट ने टेंडर में शामिल कुछ शर्तों को उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाला बताया और इसका विरोध किया कि इससे स्यवंसेवी सहायता समूह की भागीदारी खत्म हो रही है। ठेके में वित्तीय कारोबार की जो शर्तें है उससे मुठ्ठी भर कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नए सिरे से टेंडर जारी करने के लिए कहा है और आदेश दिया है कि जब तक नया टेंडर जारी नहीं हो जाता तब तक बच्चों और महिलाओं के लिए वैकल्पिक तरीके से पोषण संबंधी आहार मुहैया कराया जाए।

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