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सुप्रीम कोर्ट में बोली महाराष्ट्र सरकार, जज लोया की मौत मामले में गवाह चारों जज पर शक न करें

महाराष्ट्र की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा, ‘‘मेरे अनुसार, चार न्यायाधीशों (जे कुलकर्णी, जे बार्डे, जे मोडक और जेआरआर राठी) के बयान असंदिग्ध हैं कि लोया की मौत स्वाभाविक और दुखद थी।’’

Author February 12, 2018 21:57 pm
सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीआई कोर्ट के जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत मामले में गवाह देने वाले उन चार न्यायाधीशों के बयान ‘‘असंदिग्ध’’ हैं जो जज बीएच लोया के जीवन के अंतिम दिन उनके साथ थे और जिन्होंने उनकी मौत को ‘‘स्वाभाविक’’ बताया था। लोया सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सुनवाई कर रहे थे। एक दिसंबर 2014 को नागपुर में कथित हृदयाघात से उनका उस समय निधन हो गया था जब वह अपने एक सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने गए थे।

महाराष्ट्र की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा, ‘‘मेरे अनुसार, चार न्यायाधीशों (जे कुलकर्णी, जे बार्डे, जे मोडक और जेआरआर राठी) के बयान असंदिग्ध हैं कि लोया की मौत स्वाभाविक और दुखद थी।’’ उन्होंने पीठ को बताया कि ये न्यायाधीश 29 नवंबर से एक दिसंबर 2014 तक लोया के साथ थे। बयानों पर न्यायाधीशों के हस्ताक्षर हैं। क्या वे विश्वसनीय नहीं हैं ? पीठ में न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं।

रोहतगी ने पीठ से कहा, ‘‘यदि आप (अदालत) न्यायाधीशों के बयानों को खारिज करना चाहते हैं जिन्होंने यह कहा कि लोया की मौत स्वाभाविक थी तो प्रथम दृष्टया यह स्वीकार करना होगा कि वे सह-षड्यंत्रकारी थे…’’ जनहित याचिकाओं पर फैसलों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने यह तय करने के लिए अपने नियमों में संशोधन कर दिया था और दिशा निर्देश तय किए थे कि कौन जनहित याचिकाएं दायर कर सकता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रेरित जनहित याचिकाएं हतोत्साहित हों और उन पर विचार नहीं किया जाए।

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