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भुगतान में देरी पर फूटा महाराष्‍ट्र के गन्‍ना किसानों का गुस्‍सा, चीनी मिलों में लगा दी आग

कोल्हापुर जिले में चार ऑफिसों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें जबरन बंद करा दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तीन चीनी मिलों की सुरक्षा बढ़ा दी है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

चीनी मील मालिकों द्वारा गन्ना किसानों को भुगतान में देरी और आंशिक भुगतान ने शनिवार (12 जनवरी, 2019) को उग्र रूप धारण कर लिया। किसानों के एक समूह ने दो चीनी मिलों के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया और चार ऑफिसों को जबरन बंद करा दिया। इसके अलावा अज्ञात किसानों ने सतारा और सांगली जिले में दो चीनी मिलों को आग के हवाले कर दिया। कोल्हापुर जिले में चार ऑफिसों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें जबरन बंद करा दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तीन चीनी मिलों की सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस ने बताया कि छह मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। हमलावरों की पहचान की जा रही है।

किसानों को जब इस बात का अंदाजा हुआ कि अधिकांश निजी और सहकारी चीनी कारखानो ने केवल 80 फीसदी पैसा उनके बैंक खातों में जमा किया, यह घटना घट गई। पेराई के लिए गन्ना लेने के 14 दिनों के भीतर कारखानों को पूरा भुगतान अनिवार्य किए जाने से किसान नाराज थे। इसके अलावा कारखानों ने 2,300 रुपए प्रति टन की दर से उनके खाते में पैसा जमा किया जबकि एफआरपी 2,800 रुपए प्रति टन है। महाराष्ट्र की अधिकांश फैक्ट्रियों ने तीन महीने से अधिक समय से किसानों को भुगतान नहीं किया है, जिससे चीनी सुगर बेल्ट में अशांति पैदा हो रही है।

दूसरी तरफ सांगली और कोल्हापुर जिले में शुगरकेन कंट्रोल एक्ट का उल्लंघन करने के आरोप में सुगर कमिश्नर ने 37 फैक्ट्रियों को नोटिस भेजा है। मामले में एक पुलिसकर्मी ने बताया, ‘गन्ना किसानों को पश्चिमी महाराष्ट्र में देरी से भुगतान एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसे राज्य का चीनी का कटोरा कहा जाता है। शुक्रवार को आधी रात के वक्त एक अज्ञात लोगों का झुंड सांगली जिले में क्रांति सुगर फैक्ट्री और सतारा जिले में कृष्णा सुगर फैक्ट्री के बाहर इकट्ठा हुआ और गन्ना ऑफिस को आग के हवाले कर दिया।’ एक अन्य पुलिसकर्मी ने बताया कि हमलावरों द्वारा दफ्तरों को खूब नुकसान पहुंचाया गया है। इसी तरह की घटनाएं अन्य चार फैक्ट्रियों जवाहर, दत्ता, गुरुदत्ता और कुरुंदवाड में घटीं।

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