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शिरडी: साईंबाबा मंदिर में श्रद्धालुओं के चलने से बनेगी बिजली, उसी ऊर्जा से चलेंगे मंदिर के बल्ब और पंखे

औसतन 50,000 श्रद्धालु प्रतिदिन मंदिर में दर्शन करने आते हैं। हवारे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘करीब 50,000 श्रद्धालु प्रतिदिन शिरडी आते हैं।

Author June 2, 2017 6:23 PM
साईंबाबा मंदिर में औसतन 50,000 श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन करने आते हैं। (File Photo)

प्रसिद्ध साईंबाबा मंदिर का कामकाज देखने वाला शिर्डी न्यास एक नवीन तरीके पर काम कर रहा है जिसमें श्रद्धालुओं की पद-ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली पैदा करने में किया जाएगा। अगले वर्ष होने वाले साईंबाबा समाधि शताब्दी समारोह से पहले कई परियोजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए श्री साईंबाबा संस्थान न्यास (एसएसएसटी) के अध्यक्ष सुरेश हवारे ने गुरुवार (1 जून) को संवाददाताओं से कहा कि प्रस्तावित परियोजना के तहत मंदिर में ऊर्जा पैडल लगाए जाएंगे। यह मंदिर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है।

औसतन 50,000 श्रद्धालु प्रतिदिन मंदिर में दर्शन करने आते हैं। हवारे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘करीब 50,000 श्रद्धालु प्रतिदिन शिरडी आते हैं। हम ऊर्जा पैडल लगाएंगे, चलने पर पैडल दबेंगे और फिर वापस सामान्य हो जाएंगे। इससे ऊर्जा उत्पन्न होगी। चलने से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा बिजली में बदली जाएगी। इस तरह पैदा होने वाली बिजली से मंदिर क्षेत्र में बल्ब जलेंगे और पंखे चलेंगे।’’

उन्होंने कहा कि न्यास परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है। न्यास ने जिन परियोजनाओं की घोषणा की है उनमें आदिवासी तथा वंचित तबके के बच्चों के लिए आईएसएस प्रशिक्षण अकादमी शुरू करना, कैंसर अस्पताल स्थापित करना, ठोस कचरे से ऊर्जा उत्पादन, प्रतिदिन रक्तदान शिविर लगाना शामिल है। एक से 18 अक्टूबर के बीच आयोजित होने वाले ‘समाधि शताब्दी महोत्सव’ में इनका आयोजन किया जाएगा। प्रबंधन समिति ने आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की महिलाओं और छात्रों को मदद करने का भी फैसला लिया है।

बता दें कि पश्चिमी भारत के शिरडी साईं बाबा मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यहां की खास बात ये है कि मंदिर में बने किचन को सोलर एनर्जी के इस्तेमाल से चलाया जाता है। माना जाता है कि साईं के प्रसादालय में साई से सेहतमंद होने की प्रार्थना कर भोजन करने से सेहत में सुधार होता है। हर रोज हजारों श्रद्धालु मुफ्त में यहां का बना खाना खाते हैं।

यहां काम करने वाले एक कर्मचारी के मुताबिक, कई बार एक दिन में 70-80 हजार लोग एक बार में खाना खाते हैं। इस मेगा किचन को ऊर्जा से चलाने के लिए ऊर्जा के ऐसे स्त्रोत का इस्तेमाल किया है, जो ना सिर्फ बेशुमार है, बल्कि साईं बाबा के सिद्धांतों से भी मेल खाता है। यहां सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए छत पर बड़ी-बड़ी छतरी लगाई गई हैं। इस पूरे सेटअप को सोलर एनर्जी एक्सपर्ट दीपक गढ़िया की देखरेख में तैयार किया गया है।

देखिए वीडियो - कर्नाटक में मंदिर दरगाह एक साथ

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