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पुणे पुलिस बोली- वरवरा राव, अरुण फेरेरिया और वरनॉन गोंजालवेस लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने की रच रहे थे साजिश

वरनॉन गोंजालवेस के वकील रितेश देशमुख ने कहा, "आरोप है कि इन लोगों ने एंटी फासिस्ट विचारधारा का समर्थन किया, हमारा सवाल यह है कि इसमें आखिर गलत क्या है? क्या असहमति जताना देश के खिलाफ उठाया गया कदम है, इन आरोपों पर सिर्फ हंसा जा सकता है।"

Author August 30, 2018 11:50 AM
नक्सलियों से कथित संबंध के मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार अरुण फेरेरिया (बाएं) और एक्टिविस्ट वरवरा राव फोटो- पीटीआई

पुणे पुलिस ने बुधवार (29 अगस्त) को शहर की एक अदालत को बताया कि नक्सलियों से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार वरवरा राव, अरुण फेरेरिया और वरनॉन गोंजालवेस प्रतिबंधित संस्था कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के ‘सक्रिय सदस्य’ थे। पुलिस ने अदालत को बताया कि वे एक एंटी फासिस्ट फ्रंट की स्थापना करना चाहते थे और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई देश की सरकार को ‘उखाड़ फेंकना’ चाहते थे। पुलिस ने 31 दिसंबर को पुणे में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम एलगार परिषद में इनके रोल को लेकर कुछ नहीं कहा।

पुलिस ने दावा किया कि ये कार्यकर्ता एक पिरामिड किस्म के संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता थे, जो कि नीचे के कार्यकर्ताओं को आदेश देते थे। पुलिस ने कहा कि एलगार परिषद चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने के बड़े षड़यंत्र का एक हिस्सा था। सरकारी वकील उज्ज्वल पवार ने सिटी कोर्ट को कहा, “ये एक पिरामिड जैसा है, जहां पर सबसे ऊपर का व्यक्ति नीचे व्यक्तियों को ऑर्डर देता है, इन्हीं के आदेशों के मुताबिक पुणे में एलगार परिषद आयोजित किया गया था, इसका मकसद प्रतिबंधित संस्था कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के उग्र विचारों का देश में प्रसार करना और भारत की लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकना था।”

बता दें कि ये प्रतिबंधित संस्था भारत की सरकार को सालों से उखाड़ फेंकने की मंशा रखती है। इनकी गिरफ्तारी को सही ठहराते हुए उज्जवल पवार ने कहा कि वरवरा राव, अरुण फेरेरिया और वरनॉन गोंजालवेस के अलावा दूसरे आरोपियों ने एक षड़यंत्र पर काम किया। ये काम तब हुआ जब सीपीआई माओइस्ट की ईस्टर्न रिजनल ब्यूरो मीटिंग हुई थी। इस बैठक में ऑल इंडिया यूनाइटेड फ्रंट बनाने पर चर्चा हुई थी। सरकारी वकील ने दावा किया कि एंटी फासिस्ट फ्रंट इसी मीटिंग का नतीजा था। उन्होंने दावा किया कि एंटी फासिस्ट फ्रंट के बैनर तले ही पुणे में एलगार परिषद आयोजित किया गया था।

बचाव पक्ष के वकील ने सरकारी वकील के आरोपों और तर्कों को बचकाना बताया। वरनॉन गोंजालवेस के वकील रितेश देशमुख ने कहा, “आरोप है कि इन लोगों ने एंटी फासिस्ट विचारधारा का समर्थन किया, हमारा सवाल यह है कि इसमें आखिर गलत क्या है? क्या असहमति जताना देश के खिलाफ उठाया गया कदम है, इन आरोपों पर सिर्फ हंसा जा सकता है।”

इधर समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक पुलिस ने कहा कि उसके पास ऐसे ‘‘साक्ष्य’’ हैं, जिनसे पता चलता है कि ‘‘आला राजनीतिक पदाधिकारियों’’ को निशाना बनाने की साजिश थी। पुलिस ने यह भी दावा किया कि सबूत से पता चलता है कि गिरफ्तार लोगों के कश्मीरी अलगाववादियों से संबंध थे। पुणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) शिवाजीराव बोडखे ने ऐसे साक्ष्य होने का भी दावा किया जिससे पता चलता है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के तार कश्मीरी अलगाववादियों से जुड़े थे।

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