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बेटे की मौत के दो साल बाद बच्चे पैदा करवा रहा यह परिवार, जानिए पूरी कहानी

ये शख्स 2013 में जब जर्मनी में पढ़ाई कर रहा था तभी डॉक्टरों ने उसके शरीर में ब्रेन ट्यूमर का पता लगाया था। डॉक्टरों को आशंका थी कि कीमोथेरेपी की वजह से युवक की प्रजनन क्षमता खत्म हो सकती है, इसलिए डॉक्टरों ने कीमोथेरेपी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही उसका वीर्य संरक्षित कर लिया था।
प्रतीकात्मक तस्वीर

महाराष्ट्र के पुणे में 27 साल के एक युवक के माता-पिता ने अपने बेटे की मौत के बाद उसके वीर्य से दो बच्चे पैदा करवाए हैं। दो साल पहले इस युवक की मौत ब्रेन ट्यूमर से हो गई थी। इस बीमारी से पीड़ित होने से पहले ही इस युवक के माता-पिता ने एक मेडिकल सेंटर पर अपने बेटे का वीर्य सुरक्षित करवा रखा था। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, डॉक्टरों ने लड़के के वीर्य के साथ एक महिला डोनर द्वारा दिये गये अंडाणु के साथ मिलान करवाया और भ्रूण तैयार किया। इसके बाद डॉक्टरों ने इस भ्रूण को सरोगेट मां के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया। जिस महिला के गर्भ में भ्रूण प्रत्यारोपित किया गया है, वो युवक की रिश्तेदार थी। महिला ने दो दिन पहले ही दो जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है। दोनों ही बच्चे लड़के हैं और स्वस्थ हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने इस पूरी प्रक्रिया पर नैतिक सवाल खड़े किये हैं।

बता दें कि ये शख्स 2013 में जब जर्मनी में पढ़ाई कर रहा था, तभी डॉक्टरों ने उसके शरीर में ब्रेन ट्यूमर का पता लगाया था। डॉक्टरों को आशंका थी कि कीमोथेरेपी की वजह से युवक की प्रजनन क्षमता खत्म हो सकती है, इसलिए डॉक्टरों ने कीमोथेरेपी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही उसका वीर्य संरक्षित कर लिया था। 2016 में कैंसर की वजह युवक की मौत हो गई। युवक की 49 साल की मां ने कहा कि उनका बेटा बेहद जिंदादिल इंसान था। उन्होंने कहा कि कीमोथेरेपी की कठिन प्रक्रिया से गुजरने के बावजूद उसके बेटे ने हिम्मत नहीं हारी। इस दौरान उसके आंखों की रोशनी चली गई थी, फिर भी जिंदगी के प्रति उसकी चाहत बरकरार थी। इस दौरान भी यह युवक कहानियां और चुटकुले सुनाकर सभी का मन बहलाता था। तभी उसकी मां ने फैसला किया था कि उसे अपने बेटे जैसा ही पोता-पोती चाहिए था।

महिला ने जर्मनी से अपने बेटे का वीर्य मंगाया और पुणे के शहयाद्री अस्पताल में आईवीएफ प्रक्रिया के लिए संपर्क किया। इसके बाद डॉक्टर ने एक महिला डोनर को खोजा, जिसका चेहरा-मोहरा और नैन-नक्श युवक से मिलता हो। इसके बाद सरोगेट मदर की तलाश शुरू हुई। पहले तो मृत युवक की मां ही उसके बच्चे को अपने गर्भ में धारण के लिए तैयार थी, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि वह मेडिकली फिट नहीं है। इसके बाद युवक 38 साल की एक रिश्तेदार इसके लिए राजी हो गई। सरोगेसी एक्सपर्ट सुप्रिया पुराणिक ने कहा कि सारी मेडिकल जांच करने के बाद महिला के गर्भ में भ्रूण प्रत्यारोपित कर दिया गया। हालांकि, चेन्नई स्थित इंडियन सरोगेसी लॉ सेंटर के संस्थापक हरी जी राम सुब्रमनियम इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि क्या इस बात के लिए युवक से इजाजत ली गई कि उसकी मौत के बाद उसके वीर्य का इस्तेमाल नये बच्चे को जन्म देने के लिए किया जाएगा। वह कहते हैं कि बच्चों के भविष्य का क्या होगा, बच्चों के अधिकार क्या होंगे? वह यह भी कहते हैं कि माता-पिता बनना एक शख्स का अधिकार हो सकता है, लेकिन दादा-दादी बनने का अधिकार मौलिक अधिकारों की व्याख्या के बाहर आता है। इस मुद्दे पर अभी बहस चल रही है।

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