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भारत की नागरिकता मांगने वाले पाकिस्तानियों में कई गुना इजाफा, यह है वजह

भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों में बड़ी तादाद पाकिस्तान से भारत में आने वाली दुल्हनों की भी है। इन वधुओं ने भारतीय नागरिकता के लिए एक दशक से ज्यादा वक्त तक इंतजार किया है।

मुस्लिम महिला की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। EXPRESS PHOTO BY PRAVEEN KHANNA

महाराष्ट्र में बड़ी तादाद में पाकिस्तानी नागरिक भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर रहे हैं। आवेदन की तादाद में छह गुना तक बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। ये बढ़ोत्तरी दिसंबर 2017 में आव्रजन संबंधी नियमों में ढील देने और आसान बनाने के बाद हुई है। भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों में बड़ी तादाद पाकिस्तान से भारत में आने वाली दुल्हनों की भी है। इन वधुओं ने भारतीय नागरिकता के लिए एक दशक से ज्यादा वक्त तक इंतजार किया है। इस संबंध में टीओआई ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के माहिम में रहने वाली 36 साल की जाहिदा अंसारी असल में कराची की हैं। लेकिन जाहिदा को भारत की नागरिकता अपने कजिन मोहम्मद आजम से शादी के 10 साल बाद मिल पाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में पैदा हुई अस्मा गज़धर ने कहा,”भारतीय नागरिकता से होने वाला सबसे बड़ा फायदा ये है कि आप भारत में कहीं भी आज़ादी से घूम-फिर सकते हैं।

विदेशियों को भारत में उस शहर से बाहर यात्रा करने की अनुमति नहीं होती है, जिसके लिए उन्हें वीजा मिला हो। मैं खुद बीते सात सालों में कभी भी मुंबई से बाहर नहीं गई। सिर्फ इसी वजह से विदेश से आने वाली कोई भी दुल्हन हनीमून के लिए बाहर नहीं गई। यहां तक कि बच्चे होने के बाद भी, पारिवारिक कार्यक्रमों और यहां तक कि पास के हिल स्टेशन लोनावला में जाना भी दूर का ख्वाब है।”

टीओआई ने गृह विभाग के एक अधिकारी के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पहले छह महीने में 10 के करीब आवेदन आया करते थे। लेकिन आज उसी अवधि में 50 से 60 पाकिस्तानी नागरिक महाराष्ट्र में वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं। अधिकारी के मुताबिक,” जब से मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर के जिला कलेक्टर को अधिकार दिए गए हैं। सभी आवेदन अब एक निश्चित अवधि के भीतर ही निपटाए जा रहे हैं।” वहीं मुंबई के कलेक्टर शिवाजी राव जोंधाले ने कहा,” अगर पुलिस की रिपोर्ट सकारात्मक है तो सभी आवेदन सात दिनों के भीतर निपटाए जा रहे हैं।” वर्तमान में मुंबई में नागरिकता के लिए सिर्फ सात आवेदन ही लंबित हैं।

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