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महाराष्ट्र: पुलिस अधिकारी को डुबोने की कोशिश

वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कोई शख्स पुलिस अधिकारी को बचाने नहीं आ रहा।

Author नई दिल्ली | September 8, 2016 4:38 AM
वीडियो का दृश्य।

महाराष्ट्र में पुलिसकर्मियों पर हमलों की घटनाओं की कड़ी में ताजा मामला ठाणे के कल्याण से सामने आया है, जहां गणेश उत्सव मंडल के चार युवकों ने कथित तौर पर एक पुलिस उप-निरीक्षक को डुबाने की कोशिश की। उधर पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और पुलिस वालों को संरक्षण प्रदान करने और हमलावरों को सख्त सजा देने की मांग की। उद्धव ने ऐसे समय अपनी चिंता जाहिर की, जब एक पुलिसकर्मी को झील में धकेले जाने का कथित वीडियो वायरल हुआ। इसमें ठाणे जिले के कल्याण में स्थानीय गणेश उत्सव मंडल के चार युवक उन्हें डुबाने की कोशिश करते देखे गए।
मंगलवार की शाम गणपति विसर्जन के दौरान कल्याण के कोलसेवाड़ी थाने से संबद्ध नितिन डोंडू दगाले शहर के तीसगांव तालाब में बंदोबस्त में लगे थे। जब वे विसर्जन के लिए इकट्ठे हुए लोगों को नियंत्रित कर रहे थे और लोगों को कतार में लगने को कह रहे थे तो जरी-मरी गणेश उत्सव मंडल के कुछ सदस्यों ने सख्ती दिखाए जाने का विरोध किया और फिर झगड़ा हो गया। पुलिस के मुताबिक बाद में युवकों ने कथित तौर पर उन्हें झील में धक्का दे दिया। दगाले ने जब पानी से बाहर निकलने का प्रयास किया तो एक युवक ने कूद कर उन्हें कथित तौर पर फिर से डुबाने की कोशिश की। हालांकि, दगाले तैर कर बचने में सफल रहे।

वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कोई शख्स पुलिस अधिकारी को बचाने नहीं आ रहा। कोलसेवाड़ी पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और युवकों की तलाश शुरू हो गई है। उधर महाराष्ट्र के लिए एक पूर्णकालिक गृहमंत्री की मांग करने के कुछ दिनों बाद शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पुलिसकर्मियों पर हुए हाल के हमलों को देखते हुए उनके परिवार वालों की चिंता की पृष्ठभूमि में बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की।

मुख्यमंत्री ने बाद में कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों के परिवार वालों की सभी मांगों पर विचार करेगी। वरली के बीडीडी चॉल में रहने वाले पुलिसकर्मियों के परिवार वालों ने यातायात कांस्टेबल विलास शिंदे पर हुए हमले को लेकर गुस्सा व्यक्त किया था। शिंदे की कथित तौर पर दो युवकों ने पिटाई कर दी थी, जिसके बाद 31 अगस्त को उनकी मौत हो गई। एक अन्य घटना में ठाणे में एक यातायात कांस्टेबल पर दो सितंबर को उस समय हमला हुआ, जब वह एक गाड़ी को रोकने की कोशिश कर रहा था। गृह राज्यमंत्री दीपक केसकर समेत शिवसेना के कुछ मंत्रियों और पुलिसकर्मियों के परिजनों के साथ मुख्यमंत्री से मिलने गए उद्धव ने कहा कि मुझे लगता है कि गृह विभाग को एक अलग मंत्री की जरूरत है, जो पुलिस पर हमलों को रोक सके।

उन्होंने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री से तीन चीजों की मांग की। जिसमें राज्य में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, कानून का उचित क्रियान्वयन और हमलावरों को कड़ी सजा की मांग है। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी पिछले दिनों घटना के खिलाफ बयान दिया था और पुलिसकर्मियों के परिवार वालों से मुलाकात की थी। फडणवीस ने इस मुलाकात में पुलिस कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी दी। इनमें छुट्टी वाले दिन काम करने पर पूरे दिन का वेतन, प्रधानमंत्री आवास योजना में पुलिस को शामिल करना और इस साल पुलिस आवास के लिए 2000 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है। उन्होंने पुलिसकर्मियों के मुद्दों पर ध्यान देने के लिए एक समिति बनाने का आश्वासन भी दिया, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों को शामिल किया जाएगा।

फडणवीस ने बताया कि सरकार पुलिस स्वास्थ्य के लिए अनोखी पहल पर काम कर रही है और पुलिस व जनता के बीच संवाद बढ़ाने की दिशा में भी कार्यरत है। पुलिसकर्मियों की पत्नियों के लिए एक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी योजना बनाई जा रही है। इस बीच मुंबई और पड़ोसी जिलों में पुलिसकर्मियों पर हमलों की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस ने जनता से अपील की कि इस तरह के बिना उकसावे वाले बर्ताव से बचें। इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त होने पर परिणाम भुगतने की भी चेतावनी दी गई। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सतीश माथुर ने कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमलों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जनता से उनके कामकाज का सम्मान करने की अपील की।

माथुर ने कहा कि हमारा संदेश स्पष्ट है। हम ऐसे मामलों में किसी को नहीं छोड़ेंगे। पुलिसकर्मी पर हमला करना पूरे समाज पर हमले के समान है। हर पुलिस वाला आपकी तरह है और आपमें से ही आता है। इसलिए उनके काम का सम्मान करें, क्योंंकि वे अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को दरकिनार करके अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। डीजीपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि पुलिस बल उपद्रवियों को राजनीतिक संरक्षण मिला होने की वजह से उन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा।


 

 

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