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भाजपा से छिटकने को छटपटा रही है शिवसेना

गठबंधन में प्रमुख सहयोगी भाजपा के प्रति अपना रुख कड़ा करते हुए उसने साफ तौर पर कह दिया कि महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार में बने रहना है या नहीं इस पर वह जल्द फैसला करेगी।

Author मुंबई | September 19, 2017 3:30 AM
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)

भाजपा और शिवसेना की रार अब सरेआम होती जा रही है। गठबंधन में प्रमुख सहयोगी भाजपा के प्रति अपना रुख कड़ा करते हुए उसने साफ तौर पर कह दिया कि महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार में बने रहना है या नहीं इस पर वह जल्द फैसला करेगी। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को वरिष्ठ पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी के सांसद संजय राउत ने भगवा सहयोगी की ‘नाकामियों’ को लेकर उस पर हमला बोला, जो इस बात का संकेत था कि लंबे समय से सहयोगी रहे दोनों दलों के संबंधों में तनाव और बढ़ गया है। राज्यसभा सांसद ने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों में और भाजपा नीत सरकार (केंद्र की) के खिलाफ पूरे देशभर में बहुत अधिक ‘आक्रोश’ है। राउत ने कहा, हम फैसला लेने के बहुत करीब पहुंच गए हैं, जरा इंतजार कीजिए।

बैठक के बाद तल्ख तेवर में राउत ने कहा, सरकार की नाकामी की वजह से लोगों को कई मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। शिवसेना इस सब का हिस्सा नहीं बनना चाहती। उन्होंने कहा, भाजपा शासन में महंगाई बढ़ गई और किसानों से संबंधित कई सवाल अनुत्तरित हैं। किसानों के लिए पूरी कर्ज माफी पर फैसला भी अटका हुआ है। इस सबसे गुस्सा बहुत ज्यादा है। वह दिन जल्द आएगा जब उद्धव ठाकरे सरकार में बने रहने पर अंतिम फैसला लेंगे।
ईंधन के दामों के लिए केंद्र पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने दावा किया कि ईंधन के ज्यादा दाम देश में किसानों द्वारा खुदकुशी करने का मुख्य कारण है। इस बाबत केंद्रीय मंत्री अलफोंस कन्नानथानम की एक विवादित टिप्पणी की आलोचना करते हुए शिवसेना ने इसे गरीब और मध्यवर्ग की ‘बेइज्जती’ करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि जिनके पास कोई योग्यता और जनता से जुड़ाव नहीं है वे राष्ट्र को चला रहे हैं।

ईंधन के दामों के लिए केंद्र पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने दावा किया कि ईंधन के ज्यादा दाम देश में किसानों द्वारा खुदकुशी करने का मुख्य कारण है। शिवसेना केंद्र और महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ एनडीए की सहयोगी है। कन्नानथानम केंद्रीय मंत्री परिषद में पर्यटन और आइटी मंत्री के तौर पर हाल ही में शामिल किए गए हैं। उन्होंने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों का यह कहते हुए बचाव किया था कि वाहन मालिक ‘भूखे नहीं मर रहे’ और पेट्रोल का खर्चा वहन कर सकते हैं। शिव सेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा गया, गरीबों को कभी बेइज्जत नहीं किया गया, कांग्रेस के शासन में भी। इसमें कहा गया कि कन्नानथानम की इस टिप्पणी से मध्यम वर्गीय आदमी का अपमान किया गया है। शिवसेना ने कहा कि कांग्रेस के शासन में जब ईंधन के दाम बढ़ रहे थे तब राजनाथ ंिसह, स्मृति ईरानी और सुषमा स्वराज, जो अब मंत्री हैं, विरोध के लिए सड़कों पर बैठ गए थे। शिवसेना ने कहा, राष्ट्र आज महसूस कर रहा है कि जब अयोग्य और जनता से नहीं जुड़े लोग सरकार में आते हैं और राष्ट्र पर शासन करते हैं तब क्या होता है। इसमें आरोप लगाया कि ईंधन का ज्यादा दाम ही देश भर में किसानों की खुदकुशी की मुख्य वजह है।

 

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