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प्रीति राठी तेजाब हमले का आरोपी दोषी करार

प्रीति को रक्षा मंत्रालय के तहत आइएनएचएस अश्विनी अस्पताल में नर्स की नौकरी मिल गई थी और पंवार को प्रीति का अच्छा करियर बनने के कारण उससे जलन थी।
Author मुंबई | September 7, 2016 04:28 am
कैंसर की बीमारी से जूझ रहे प्रीति के पिता अमर सिंह राठी ने कहा कि पंवार को मौत की सजा दी जानी चाहिए।

प्रीति राठी तेजाब हमला मामले के आरोपी अंकुर लाल पंवार को विशेष महिला अदालत ने हत्या का दोषी करार दिया है। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश एएस शेंदे ने पंवार को भादंसं की धारा 302 (हत्या) और धारा 326बी (जानबूझ कर तेजाब फेंकना) के तहत दोषी पाया है। सजा पर फैसला बुधवार को बहस के बाद होगा। तकरीबन एक साल की सुनवाई के दौरान 37 गवारों के बयान लिए गए। स्पेशल पब्लिक प्रासीक्यूटर उज्जवल निकम ने दोषी के लिए फांसी की सजा की मांग की है।

दिल्ली निवासी प्रीति पर होटल मैंनेजमेंट से स्नातक पंवार ने मई 2013 मेंं तेजाब फेंका था। इसके बाद प्रीति के महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और उनकी मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक प्रीति को रक्षा मंत्रालय के तहत आइएनएचएस  अश्विनी अस्पताल में नर्स की नौकरी मिल गई थी और पंवार को प्रीति का अच्छा करियर बनने के कारण उससे जलन थी। इसी जलन के कारण उसने प्रीति पर तेजाब फेंका था। उधर अदालत के बाहर पंवार की मां कैलाश ने मामले की सीबीआइ जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उनके बेटे को मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा, ‘हम गरीब हैं इसलिए हमें फंसाया गया। मैं मामले की सीबीआइ जांच की मांग करती हूं।’

कैंसर की बीमारी से जूझ रहे प्रीति के पिता अमर सिंह राठी ने कहा कि पंवार को मौत की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें तीन साल बाद जाकर न्याय मिला है। न्याय मिला इसकी मुझे खुशी है लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि उसे मौत की सजा मिले। पहले इस मामले की जांच बांद्रा रेलवे पुलिस स्टेशन ने की। बाद में जांच मुंबई पुलिस अपराध शाखा को सौंपी गई। एक सुनवाई के दौरान अमर सिंह राठी ने अदालत को बताया कि वे बांद्रा टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर प्रीति से 10-15 कदम आगे चल रहे थे, जब, ‘मैंने उसकी चीख की आवाज सुनी। उसकी मदद के लिए जब मैं पीछे मुड़ा, तो मैंने एक युवक को देखा। उसने पीले रंग की शर्ट पहनी हुई थी और उसका चेहरा रुमाल से ढंका हुआ था, वह युवक तेजी से भाग खड़ा हुआ था। तेजाब की कुछ बंूदें मेरे हाथ, कं धे व पैरों पर भी गिर गई थीं। प्रीति का चेहरा और गरदन बुरी तरह जल गए थे।’ तेजाब प्रीति के फेफड़ों तक में चला गया था। हमले से वह अगले 30 दिनों तक न तो बोलने में और न ही कुछ देख पाने में सक्षम थी। दर्द से जूझते हुए वह समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ किसी ने ऐसा क्यों किया। अस्पताल में इलाज के दौरान वह अपनी बात बमुश्किल लिख कर बता पाती थी। उसकी लिखी वे पर्चियां परिवार वालों ने अब तक संभाल कर रखी हुई हैं।

 

 

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