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दलित लेखकों को साहित्य बैठक छोड़ने पर मजबूर किया गया

दलित विद्वान रावसाहेब कसाबे को छत्रपति शिवाजी महाराज पर उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए मराठी साहित्य बैठक छोड़ने के लिए बाध्य कर दिया गया।
Author पुणे | October 14, 2016 03:18 am
छत्रपति शिवाजी।

जानी-मानी दलित लेखिका प्रदन्या पवार और दलित विद्वान रावसाहेब कसाबे को छत्रपति शिवाजी महाराज पर उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए मराठी साहित्य बैठक छोड़ने के लिए बाध्य कर दिया गया। बैठक का आयोजन महाराष्ट्र साहित्य परिषद ने सतारा जिले के पाटन में किया था और आरोप लगाया गया कि घटना रविवार को हुई, जब उग्र भीड़ ने दोनों को 17वीं सदी के मराठा शासक शिवाजी पर उनकी टिप्पणियों के जरिए मराठा समुदाय की भावनाओं को ‘चोट’ पहुंचाने के लिए कार्यक्रम छोड़ने को कहा। कसाबे को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था, जबकि पवार को दो दिवसीय कार्यक्रम का अध्यक्ष चुना गया था। यह कार्यक्रम बाबा साहब आंबेडकर को समर्पित था।

पवार ने कहा कि पहले दिन शनिवार को बैठक काफी अच्छी रही। मैंने और कसाबे ने अपना भाषण दिया और कार्यक्रम में भाग ले रहे लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया आई। हालांकि, दूसरे दिन जब कार्यक्रम चल रहा था, तब 100 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ कार्यक्रम स्थल पर आई और हमें वहां से जाने पर मजबूर किया। आयोजकों ने हमसे अपना बैग पैक करने और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वहां से जाने का अनुरोध किया। पवार ने बताया कि वे तत्काल वहां से चले गए।

उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि अगर उनका भाषण आपत्तिजनक था तो तत्काल हंगामा क्यों नहीं हुआ। हमसे उग्र भीड़ ने कहा कि हम दलित हैं और हमें मराठों पर कुछ भी नहीं बोलना चाहिए। उन्होंने हमसे कहा कि अगर हमने आगे कुछ बोला तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और हमसे वहां से जाने को कहा। पवार दिवंगत मराठी लेखक और कवि दया पवार की बेटी हैं। दया पवार को दलित साहित्य में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने घटना को सांस्कृतिक आतंकवाद का कृत्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप करार दिया।

संपर्क किए जाने पर कसाबे ने कहा कि उन्होंने उग्र भीड़ के साथ बातचीत करने का प्रयास किया। लेकिन वे उनकी बात सुनने के मूड में नहीं थे। मैंने उनसे कहा कि मैं कौन हूं। क्या आपने मेरे लेखन को पढ़ा है। क्या आप जानते हैं कि मैंने क्या कहा था। लेकिन उन्हें कुछ भी पता नहीं था और वे माफी मांग रहे थे। कसाबे ने कहा कि उन्होंने उनसे कहा कि अगर वे आहत हुए हैं तो उनसे माफी मांगने की भी पेशकश की। उन्होंने आरोप लगाया कि उग्र भीड़ को स्थानीय शिवसेना विधायक शंभुराज देसाई ने भेजा था। उनकी राकांपा के विक्रमसिंह पाटनकर के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। पाटनकर साहित्यिक बैठक के आयोजकों में से एक थे।

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