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सामान्य वर्ग को आरक्षण पर बढ़ेगा तनाव! ओबीसी संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ओबीसी संहर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष ने कहा, 'हम सभी 25 फरवरी को राज्य भर में रैली निकालने जा रहे हैं। हमारी मांग है कि ओबीसी की आबादी 52 प्रतिशत है तो अब हमें मिलने वाले आरक्षण की सीमा बढ़ाई जाए'।

प्रतीकात्मक तस्वीर

सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का बिल संसद में पास कराने वाली मोदी सरकार के सामने नया बवाल खड़ा हो सकता है। पहले एससी-एसटी मुद्दे पर सवर्णों की नाराजगी उठाई और अब ओबीसी संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दे डाली है। महाराष्ट्र के संगठनों ने 25 फरवरी को राज्यभर में रैली निकालने की धमकी दी है। इनकी मांग है कि जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।

संगठन के नेताओं ने फैसला लिया है कि ओबीसी और वीजेएनटी संहर्ष समन्वय समिति के साथ ओबीसी संहर्ष समिति की तरफ से यह विरोध दर्ज कराया जाएगा। ओबीसी नेता प्रकाश अन्ना सेगड़े को बीते दिनों मुम्बई में हुई बैठक के दौरान नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई। वहीं वीजेएनटी संगठन विमुक्त जाति और नोमैडिक ट्राइब के लिए संहर्षशील है। ओबीसी संहर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष ने कहा, ‘हम सभी 25 फरवरी को राज्य भर में रैली निकालने जा रहे हैं। हमारी मांग है कि ओबीसी की आबादी 52 प्रतिशत है तो अब हमें मिलने वाले आरक्षण की सीमा बढ़ाई जाए’।

अब समिति की योजना सभी ओबीसी नेताओं तक पहुंच बनाने की है। जिसमें कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के नेता भी शामिल हैं। इसके साथ संगठन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का भी समर्थन लेने के मूड में है। महाराष्ट्र में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। जो शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरी में लागू होता है। इसके साथ ही स्थानीय चुनाव में भी इन्हें रिजर्वेशन का फायदा मिलता है।

बता दें कि, सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का 124वां संविधान संशोधन बिल बुधवार (9 जनवरी) को राज्यसभा में भी पास हो चुका है। बिल के पक्ष में 165 और विरोध में सात वोट पड़े। रात 10 बजे के बाद इस बिल पर वोटिंग कराई गई। 10 घंटे तक चली चर्चा के बाद राज्यसभा में बिल पास हो गया। राज्यसभा में बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक न्याय की जीत बताया था। लोकसभा में मंगलवार (8 जनवरी) को बिल पास हुआ था।

 

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