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महाराष्‍ट्र के इस गांव में शादी के लिए दहेज देते हैं पुरुष, जानिए क्‍या है वजह

सर्वे के मुताबिक गांव में कुल 1,438 लोग रहते हैं। इसमें करीब 82 फीसदी मराठा समुदाय से संबंध रखते हैं, जिनमें 75 फीसदी के करीब पुरुषों ने विवाह करने के लिए लड़की के परिजनों को 1-2 लाख रुपए दहेज दिया।

(Express Photo)

महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित मान तालुका के शिंदी खुर्द गांव के युवाओं को शादी करने में मुश्किल हो रही है। गांव की हालत इतनी खराब है कि उन्हें शादी के लिए दुल्हन के परिवार को राजी करने के चलते दहेज तक देना पड़ता है। शिंदी खुर्द में कोई अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां युवाओं में रोजगार की कमी, आय के स्त्रोत और कम शिक्षा है। पुणे स्थित बुधाजीराव मुळीक भूमाता चैरीटेबल ट्रस्ट के सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। सर्वे 2015 से 2018 के बीच कराया गया। ट्रस्ट उन संगठनों में से एक है, जिन्होंने राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एन जी गायकवाड़ के नेतृत्व वाले पिछड़ा वर्ग आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जा चुकी है, लेकिन अभी इसे राज्य विधायिका के सामने पेश किया जाना है। आयोग के अध्यक्ष ने मुळीक, जो कृषि विशेषज्ञ हैं, से इस मुद्दे पर बात भी की है। मुळीक के एक सहयोगी ने बताया कि गायकवाड़ ने मराठा समुदाय के सामाजिक और शिक्षा के स्तर पर लंबी बातचीत की। हालंकि जब मुळीक से बातचीत की कोशिश की गई तो उन्होंने इस मामले में विस्तृत जानकारी देने से यह कहकर मना कर दिया कि आयोग की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि सर्वे का नेतृत्व कर रहीं और अपना बचपन शिंदी खुर्द में बिताने वाली प्रियंका इस मामले में खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि भुमाता ट्रस्ट ने मराठा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति को जानने के लिए शिंडी खुर्द में सर्वेक्षण किया। इस गांव में मराठा आबादी की संख्या अधिक है। इसे कई अन्य गांवों के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया था जहां मराठा समुदाय की स्थिति अलग नहीं है।

प्रियंका ने बताया, ‘सर्वे के मुताबिक गांव में कुल 1,438 लोग रहते हैं। इसमें करीब 82 फीसदी मराठा समुदाय से संबंध रखते हैं, जिनमें 75 फीसदी के करीब पुरुषों ने विवाह करने के लिए लड़की के परिजनों को 1-2 लाख रुपए दहेज दिया। ज्यादातर परिवार अपनी बेटी का ब्याह इस गांव में नहीं करना चाहते। ऐसा तब है मान तालुका के अन्य गांवों की तुलना में शिंदी खुर्द में अच्छी बारिश हुई। गांव में जो लड़कियां सबसे अधिक ब्याहकर आईं, वो मराठावाड़ा से हैं।’ एमपीएससी की तैयारी कर रहीं प्रियंका कहती हैं, ‘विवाह करने के लिए मराठा पुरुषों के लिए दहेज ही काफी नहीं है। मराठा समुदाय ऊंची जाति से संबंध रखते हैं इसलिए अपने ही समुदाय से लड़के लाने के लिए वो हर संभव कोशिश करते हैं। मगर अभी वर्तमान में उनकी स्थिति, खासतौर पर शिंदी खुर्द जैसे गांव में, ऐसी है कि आदिवासी लड़की घर की बहू बनाने के लिए मजूबर हैं। उनके पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है, क्योंकि आदिवासी लड़की दहेज की मांग नहीं करतीं।’

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