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डीयू प्रोफेसर जीएन साईबाबा और 5 अन्य उम्रकैद की सजा, माओवादियों से था संबंध

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली कोर्ट ने इन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) एक्ट के तहत दोषी ठहराया है।
डीयू प्रोफेसर जीएन साईबाबा

छत्तीसगढ़ कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कोर्ट ने मंगलवार को डीयू प्रोफेसर जीएन साईबाबा को उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा पांच अन्य को भी प्रोफेसर के साथ ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, जबकि एक अन्य दोषी टिरके को 10 साल की जेल हुई। गौरतलब है कि माओवादियों के साथ संबंध रखने के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए साईबाबा को मंगलवार सुबह महाराष्ट्र के गढ़चिरौली कोर्ट ने दोषी करार दिया था।

गढ़चिरौली कोर्ट ने साईबाबा और जेएनयू स्टूडेंट हेम मिष्ठा समेत 6 आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) एक्ट की धारा 13, 18, 20, 38, 39 और आईपीसी की धारा 120 B के तहत दोषी करार दिया था। प्रोफेसर साईबाबा पोलियो से ग्रसित हैं और उनका 90 फीसदी शरीर अक्षम है। दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर जीएन साईबाबा को महाराष्ट्र पुलिस ने मई 2014 में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनपर प्रतिबंधित संगठन भाकपा-माओवादी का कथित सदस्य होने, उन लोगों को साजोसामान से समर्थन देने और भर्ती में मदद करने के आरोप लगाया था।

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