सीएम देवेंद्र फडणवीस की कार ने 13 बार तोड़े ट्रैफिक नियम, चालान कटा पर जुर्माना माफ

जब पहली बार ओवर स्पीड की वजह से पहला चालान जारी हुआ तब ट्रेफिक विभाग ने कहा कि सीएम काफिले को सुरक्षा के चलते इस मामले में छूट प्राप्त है।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। (फाइल फोटो)

कभी तेज रफ्तार से वाहन चलाने की वजह से आपका चालान कटा है? कभी ऐसा हुआ है कि नियम को तोड़ते हुए आपने वाहन तेज चलाया हो और आपका चालान माफ कर दिया गया हो? बिल्कुल… आपके साथ ऐसा नहीं होगा, क्योंकि कानून इसकी इजाजत नहीं देता। हालांकि अगर आप किसी राज्य के मुख्यमंत्री हैं तो इस मामले में आपको माफी मिल सकती है। हाल के दिनों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की गाड़ियों के ओवर स्पीड की वजह से कटे चालान और बाद में इनके निरस्त किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।

दरअसल ओवर स्पीड के चलते मुंबई पुलिस ने मुख्यमंत्री के काफिले के चालान काटे। ऐसा एक या दो बार नहीं बल्कि 13 बार हुआ। मुख्यमंत्री के वाहन MH01 CP 0037 और MH01 CP 0038 ने इस साल बांद्रा वर्ली सी लिंक के आसपास 13 बार ट्रेफिक नियम तोड़े। ये नियम 12 जनवरी, 2018 से 12 अगस्त, 2018 के बीच तोड़े गए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के काफिले द्वारा ट्रेफिक नियम तोड़े जाने के दौरान ये सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गए। नियम के मुताबिक ट्रेफिक नियम तोड़ने पर एक हजार रुपए का फाइन हुआ, 13 बार नियम तोड़ने पर 13 हजार रुपए का फाइन हुआ।

मगर इस मामले में आम आदमी की तुलना में मुख्यमंत्री लकी साबित हुए और वह इस फाइन से बच निकले। ट्रेफिक पुलिस ने उन सभी ई चालान को रद्द कर दिया जो मुख्यमंत्री के खिलाफ जारी किए गए। ये जानकारी एक आरटीआई में सामने आई है। आरटीआई एक्टिविस्ट शकील अहमद ने बताया, ‘मैंने ट्रेफिक विभाग से उन चालानों के बारे में जानकारी मांगी जो पिछले दिनों मुख्यमंत्री काफिले द्वारा ट्रेफिक नियम तोड़ने पर उनके खिलाफ जारी किए गए थे। इस पर बताया कि उन सभी 13 चालानों को रद्द कर दिया गया है।’

बता दें कि जब पहली बार ओवर स्पीड की वजह से पहला चालान जारी हुआ तब ट्रेफिक विभाग ने कहा कि सीएम काफिले को सुरक्षा के चलते इस मामले में छूट प्राप्त है। मगर अहमद के मुताबिक सिर्फ फायर गाड़ियों, एंबुलेंस और पुलिस वाहनों को तेज गति से वाहन चलाने के मामले में विशेष छूट प्राप्त है। राज्य में विपक्षी पार्टियों ने भी इस मामले में सवाल नहीं पूछा।

हालांकि मामले में एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, ‘अगर कोई कानून है तो वो सबके लिए बराबर होना चाहिए। सीएम को अलग से इस मामले में सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वो वीवीआईपी कल्चर खत्म करना चाहते हैं, मगर उनकी पार्टी के अपने ही नेता उसे फॉलो नहीं कर रहे।’

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