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बुलंद हौसलों से बदला माहौल

ऐसी ही कहानी महाराष्ट्र की चार लड़कियों की है जो गरीबी और समाज के निचले स्तर पर रहने के बावजूद लोगों को नई राह दिखा रही हैं।
Author नई दिल्ली | November 6, 2017 03:52 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

हौसले बुलंद हों तो विपरीत परिस्थितियां आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती हैं। ऐसी ही कहानी महाराष्ट्र की चार लड़कियों की है जो गरीबी और समाज के निचले स्तर पर रहने के बावजूद लोगों को नई राह दिखा रही हैं।
गांव में स्नातक की पढ़ाई करने वाली पहली लड़की
यवतमाल जिले के घाटंजी ब्लॉक के मांडवा गांव में रहने वाली शिवानी दिलीप आंबेकर (18) हैं। आदिवासी बहुल इस इलाके में ज्यादातर बच्चियों का बाल विवाह हो जाता है, लेकिन शिवानी ने आगे पढ़ने के लिए लड़ाई लड़ी और जीती। अब वह गांव से 15 किलोमीटर दूर घाटंजी के एसपीएम साइंस एंड गिलानी आर्ट्स कॉमर्स कॉलेज से बीए कर रही हैं और आइएएस बनना चाहती हैं। शिवानी इन दिनों यूनिसेफ की सहयोगी जनसेवा संस्था में तालुका बाल संरक्षण की अध्यक्ष हैं और आसपास के 105 गांव में बाल विवाह के खिलाफ और लड़कियों को आगे पढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही हैं।
मां को बेहतर जिंदगी देना चाहती हैं गुलाब शाह
मुंबई के गोरेगांव पूर्व स्थित आरे कॉलोनी में रहने वालीं गुलाब शाह (17) का सपना एअर होस्टेस बनने का है। उनकी मां ताहिरा लोगों के घर का काम कर पूरे महीने में 2500 रुपए कमाती हैं जिससे घर चलता है। सौतेले पिता कोई मदद नहीं करते। यूनिसेफ की साझेदार ‘प्रत्येक’ संस्था के साथ जुड़ीं गुलाब शाह सुबह स्कूल जाती हैं, जो करीब 10 किलोमीटर दूर है। ‘प्रत्येक’ के साथ जुड़ने से उनकी समझ काफी विकसित हुई है। उनका कहना है कि देश के बजट का 9 फीसद बच्चों के लिए होना चाहिए। 6 फीसद उनकी पढ़ाई और 3 फीसद उनके स्वास्थ्य के लिए।
डॉक्टर बन कर समाजसेवा करना है संध्या का लक्ष्य
मुंबई के गोरेगांव पश्चिम के भगत सिंह नगर में रहने वालीं संध्या किरन सरोज (15) के परिवार में उनको मिलाकर सात लोग हैं। संध्या आसपास के इलाके में ऐसी अकेली हैं जो फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती हैं। उनके पिता राजेश सरोज फूल बेचने का काम करते हैं। ‘प्रत्येक’ से जुड़ीं संध्या डॉक्टर बनना चाहती हैं।
इनकी कोशिश से खुली पुलिस चौकी
मुंबई के शिवाजी नगर में रहने वालीं संध्या साहू (15) कक्षा 9 में पढ़ती हैं। वे यूनिसेफ की साझेदार संस्था कमिटेड कम्युनिटीज डेवलपमेंट ट्रस्ट से जुड़ी हुई हैं। संध्या और उनके कुछ साथियों ने शिवाजी नगर की ऐसी जगहों को चुना जो बच्चों के हिसाब से खतरनाक थीं। उन्होंने इसका एक मानचित्र बनाया और उसके आधार पर पुलिस से मदद मांगी। मुंबई पुलिस ने असामाजिक तत्त्वों के जमघट वाले स्थान पर एक पुलिस चौकी खोल दी। इसके अलावा पार्षद ने अंधेरे स्थानों पर लाइट का इंतजाम कर दिया। संध्या प्रोफेसर बनना चाहती हैं।

 

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