ताज़ा खबर
 

रेमंड के मालिक ने बेटे के नाम कर दी 10 अरब की कंपनी, अब खाने के पड़ गये लाले

डॉ सिंघानिया ने कंपनी में अपने सारे शेयर बेटे को दे दिये, इसकी कीमत करीब करीब एक हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन बेटे गौतम ने अपने पिता को कहीं का नहीं छोड़ा, विजयपत सिंघानिया अब अपने ही बेटे के खिलाफ केस लड़ रहे हैं।
उद्योगपति विजयपत सिंघानिया (Express Photo by Prashant Nadkar Mumbai)

भारत का ये बिजनेममैन कभी देश के सबसे रईस लोगों में गिना जाता था लेकिन वक्त ने ऐसा करवट बदला कि आज इन्हें चंद रुपयों के लिए सडकों की खाक छाननी पड़ रही है। इस धनकुबेर की ऐसी हालत के लिए वे किसी और को नहीं बल्कि अपने बेटे को ही जिम्मेदार बताते हैं। हम बात कर रहे रहे हैं देश के टॉप क्लोदिंग ब्रांड रेमंड की। नामी गिरामी उद्योगपति विजयपत सिंघानिया कभी इस कंपनी के मालिक थे। तब फिल्म से लेकर एविएशन सेक्टर में उनकी तूती बोलती थी। विजयपत सिंघानिया ना सिर्फ कामयाब बिजनेसमैन थे बल्कि उनका सिक्का एविएशन, और फिल्म इंडस्ट्री में भी चलता था। लेकिन कपड़ा इंडस्ट्री के इस बिजनेस टायकून का आरोप है कि उनके बेटे गौतम ने उनकी हालत सड़क के भिखारी जैसी कर दी है। गौतम फिलहाल इस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डॉयरेक्टर हैं। विजयपत सिंघानिया फिलहाल मुंबई में एक किराये के मकान में रहते हैं।

78 साल के विजयपत सिंघानिया ने अपने मेहनत और पसीने से रेमंड शूटिंग्स का बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबकि डॉ विजयपत सिंघानिया के वकील दिनयार मदन ने कहा कि उन्होंने अपनी सारी कंपनी अपने बेटे के नाम कर दी लेकिन अब उनका बेटा उन्हें पाई पाई के लिए तरसा रहा है। दिनयार मदन ने कहा, ‘डॉ सिंघानिया ने कंपनी में अपने सारे शेयर बेटे को दे दिये, इसकी कीमत करीब करीब एक हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन बेटे गौतम ने अपने पिता को कहीं का नहीं छोड़ा, विजयपत सिंघानिया अब अपने ही बेटे के खिलाफ केस लड़ रहे हैं, वो लोग डॉ सिंघानिया से हर चीज छिनने की कोशिश कर रहे हैं, इनकी कार ले ली गई है, ड्राइवर छीन लिया गया है।’ वकील के मुताबिक विजयपत सिंघानिया घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

बता दें कि विजयपत सिंघानियां ने मुंबई हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है और कहा है कि मालाबार हिल स्थित 36 मंजिला जेके हाउस में एक डुप्लेक्स का मालिकाना हक उन्हें नहीं दिया गया है, जबकि रेमंड के मालिक को बार बार इस बारे में बताया जा चुका है। बता दें कि 1960 में जब जेके हाउस बनाया गया था तो ये सिर्फ 14 मंजिला ढांचा था बाद में इस इमारत के चार डुपलेक्स रेमंड की होल्डिंग कंपनी पश्मीना होल्डिंग को दे दिये गये। 2007 में इस इमारत में रहने वाले लोगों ने तय किया इसका पुननिर्माण किया जाए। डील के मुताबिक विजयपत और गौतम, वीणा देवी (विजयपत के भाई अजयपत सिंघानिया की विधवा) उनके बेटे अनंत और अक्षयपत को 5,185 वर्ग फीट का डुप्लेक्स नई बिल्डिंग में 9,000 रुपये वर्गफीट के भुगतान पर मिलना था। लेकिन अब तक ये डुप्लेक्स विजयपत सिंघानियां को नहीं मिल पया है। अदालत ने संबंधित पक्ष से गुजारिश की है कि इस केस को बातचीत के जरिये ही सुलझाया जाए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.