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कोर्ट ने बलात्कार का मामला खारिज करने से किया इनकार, कहा- गंभीर अपराधों में सुलह की कोई कानून मान्यता नहीं

आरोपी नेअपनी याचिका में दावा किया कि उसके और उसके पार्टनर के बीच कुछ गलतफहमी थी जिससे वह नाराज हो गयी और उसने प्राथमिकी दर्ज करा दी।
Author मुम्बई | July 9, 2016 18:37 pm

बंबई उच्च न्यायालय ने पीड़िता से शादी करने के आधार पर बलात्कार के मामले को खारिज करने की मांग कर रहे एक व्यक्ति को यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि गंभीर अपराधों में अपराधी और पीड़ित के बीच सुलह को बिल्कुल ही कोई कानूनी मान्यता नहीं है। मोहम्मद फैजान अमीर खान लिव इन पार्टनर से झूठे वादा कर उससे कई बार कथित बलात्कार करने के सिलसिले में भादसं की धारा 376 के तहत अपने विरूद्ध दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय पहुंचा था।

खान ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसके और उसके पार्टनर के बीच कुछ गलतफहमी थी जिससे वह नाराज हो गयी और उसने प्राथमिकी दर्ज करा दी लेकिन, अब विवाद हल कर लिया गया है एवं वे दोनों आपस में शादीशुदा हैं। न्यायमूर्ति एन एच पाटिल और न्यायमूर्ति पी डी नाईक की खंडपीठ ने कहा, ‘‘आरोपी के आचरण की निंदा करने की जरूरत है। यह उल्लेख किया जा सकता है कि यह अहसास होने के बाद कि प्राथमिकी दर्ज करायी जा चुकी है और जांच मशीनरी उसे ढूढ रही है, वह मुम्बई आया और कथित रूप से शादी को अंजाम दिया। ’’

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