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स्मिता ठाकरे ने शिवसेना के खिलाफ उठाई आवाज, कहा- बालासाहेब के परिवार का होने के बावजूद BMC में होती है दिक्‍कत

बीएमसी को पिछले कुछ वर्षों से शिवसेना-बीजेपी का गठबंधन चलाता रहा है। इस बार दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं।
स्मिता (बाएं) जयदेव ठाकरे की पूर्व पत्‍नी हैं, जबकि शालिनी, राज ठाकरे की भाभी हैं।

बृहणमुंबई म्‍यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) चुनावों के लिए मतदान के दिन, ठाकरे परिवार की बहुओं के बयान सामने आए। स्मिता ठाकरे ने निकाय की कार्यशैली पर निशाना साधा है। स्‍वर्गीय बाल ठाकरे के बहिष्‍कृत पुत्र जयदेव ठाकरे की पूर्व पत्‍नी, स्मिता ने कहा कि बीएमसी में भ्रष्‍टाचार मुख्‍य समस्‍या बना हुआ है। इंडिया टुडे से बातचीत में स्मिता ने यह टिप्‍पणी की। स्मिता ने कहा, ”गड्ढों से भरी सडकें और बीएमसी में भ्रष्‍टाचार की समस्‍या अभी तक दूर नहीं हो सकी है।” उन्‍होंने सिस्‍टम को ‘पारदर्शी’ होने की वकालत करते हुए कहा कि बीएमसी में ‘फाइलें नहीं हिलतीं और काम धीमा है।’ स्मिता ने कहा, ”मुझे परिवार (ठाकरे) से होने के बावजूद बीएमसी में समस्‍या झेलनी पड़ी।” स्मिता 2004 में जयदेव से तलाक होने तक मातोश्री (ठाकरे परिवार का आधिकारिक निवास) में ही रहती थीं। गौरलतब है कि बीएमसी को पिछले कुछ वर्षों से शिवसेना-बीजेपी का गठबंधन चलाता रहा है। इस बार दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं।

दूसरी तरफ, महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे की भाभी शालिनी ठाकरे ने वोटिंग से रोकने के लिए ‘साजिश’ रचे जाने का आरोप लगाया है। उन्‍होंने कहा, ”जो लोग सालों से वोट देते आ रहे हैं, वे भी इस बार वोट नहीं डाल पाए क्‍योंकि उनके नाम वोटर लिस्‍ट में नहीं हैं। बहुत सारे लोग बिना वोट डाले वापस जा रहे हैं। मुझे लगता है कि इसमें कोई साजिश है।” श‍ालिनी ने कहा कि चुनाव में एमएनएस ने कई महत्‍वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं और उन्‍हें उम्‍मीद है कि पार्टी इन चुनावों में अच्‍छा प्रदर्शन करेगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि जब लोग ज्‍यादा संख्‍या में वोट देते हैं तो सही उम्‍मीदवार जीतता है।

बीएमसी चुनाव में भाजपा से अलग ताल ठोंक रही शिवसेना पिछले कुछ दिनों से लगातार हमलावर रही है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने तो यह तक कह दिया था कि उन्हें निकट भविष्य में मध्यावधि चुनाव नजर आ रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने यह भी संकेत दिए थे कि बीएमसी चुनावों के बाद पार्टी बीजेपी से समर्थन वापस ले सकती है।

बीजेपी और शिवसेना ने 2014 का विधानसभा चुनाव बिना गठबंधन के लड़ा था। चुनाव में बीजेपी को शिवसेना से अधिक सीटें मिली थी, बाद में दोनों के सहयोग से गठबंधन सरकार बनी।

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