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बैरक की फर्श पर नए टाइल्स, चकाचक बाथरूम, विजय माल्या के लिए यूं तैयार हुआ ऑर्थर रोड जेल

पीडब्लयूडी के एक अधिकारी ने कहा, " दो सेल का कायाकल्प किया गया है, एक जिसमें छगन भुजबल रहा करते थे, दूसरा उसके बगल वाला, सेल की फ्लोर ठीक की गई...दीवारों के टाइल्स बदले गये, यहां तक की बाथरूम के सामान भी बदले गये, एक नया कमोड लगाया गया, एक जेट स्प्रे भी फिट किया गया, पूरे काम के लिए 45 मजदूर लगया गये थे।"

शराब कारोबारी माल्या आजकल ब्रिटेन में हैं, जहां वह प्रत्यपर्ण मामले की सुनवाई का सामना कर रहे हैं। (फोटोः पीटीआई/एपी)

मुंबई के ऑर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 में पूरे महीने मरम्मत का काम हो रहा है। बैरक नंबर 12 के दो सेल का पूरी तरह से कायाकल्प किया जा रहा है। सेल के टाइल्स बदल दिये गये हैं, दीवारों पर रंगरोगन किया गया है और बाथरुम को भी चकाचक किया गया है। दरअसल ये सारी तैयारियां जेल में आने वाले एक वीआईपी कैदी को लेकर की जा रही हैं। भारत के बैंकों का हजारों करोड़ रुपया लेकर लंदन भागने वाले विजय माल्या ब्रिटिश अदालत में भारत के जेलों की खराब स्थिति का हवाला दे रहा है और भारत आने से आना-कानी कर रहा है। लंदन की अदालत ने माल्या की आपत्ति को गंभीरता से लिया है। माल्या की शिकायतों को दूर करने के लिए ही मुंबई की इस जेल के एक बैरक का कायाकल्प किया जा रहा है। सीबीआई ने इन चकाचक सेल्स की वीडियो रिकॉर्डिंग की है। इस वीडियो को सीबीआई ने विदेश मंत्रालय को भेजा है। इस वीडियो को लंदन की कोर्ट में पेश किया जाएगा और विजय माल्या के प्रत्यपर्ण का रास्ता साफ किया जाएगा।

जेल में मरम्मत का काम पीडब्लयूडी के ठेकेदार ने किया है। मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक शिवकुमार पाटिल नाम के एक ठेकेदार ने बताया कि बैरक नंबर 12 में काम किया गया है। बैरक नंबर 12 का निर्माण मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब को रखने के लिए तैयार किया गया था। ठेकेदार शिवकुमार पाटिल ने कहा, “मुझे इस पर ज्यादा बोलने के लिए नहीं कहा गया है…हमने सेल में पेटिंग की है…और बैरक नंबर 12 जाने वाले रास्ते को ठीक किया है…हमने टॉयलेट को मरम्मत किया है, फर्श भी ठीक किया है…बाहर भी रंगरोगन किया गया है।”

माल्या के वकीलों ने लंदन की अदालत में कहा था कि ऑर्थर रोड जेल में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती है। इस शिकायत को दूर करने के लिए सेल की काली दीवारों को सफेद रंग से रंगा गया है, ताकि इन दीवारों से सूरज की रोशनी रिफलेक्ट हो सके। पीडब्लयूडी के एक अधिकारी ने बताया कि 10 अगस्त को सीबीआई के अधिकारी पहली बार वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए आए थे, लेकिन इस दौरान वे काम से संतुष्ट नहीं दिखे। तीन दिन तक जेल में फिर से मरम्मत का काम हुआ और 16 अगस्त को फिर से रिकॉर्डिंग की गई। पीडब्लयूडी के एक अधिकारी ने कहा, ” दो सेल का कायाकल्प किया गया है, एक जिसमें छगन भुजबल रहा करते थे, दूसरा उसके बगल वाला, सेल की फ्लोर ठीक की गई…दीवारों के टाइल्स बदले गये, यहां तक की बाथरूम के सामान भी बदले गये, एक नया कमोड लगाया गया, एक जेट स्प्रे भी फिट किया गया, पूरे काम के लिए 45 मजदूर लगया गये थे।”

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