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कभी ऑटो चलाकर भी नहीं होती थी 200 रुपए की कमाई, अब बने पिंपरी-चिंचवाड़ के मेयर

जाधव ने साल 1997 से 2002 तक छह सीटों पर ऑटो रिक्शा चलाया। 2002 में ऑटो रिक्शा की नौकरी छोड़ी तो खेती के क्षेत्र में आ गए। हालांकि कुछ दिनों बाद ही उन्होंने खेती का काम यह कहकर छोड़ दिया कि इसमें अब लाभ नहीं रहा और निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने लगे।

दस साल पहले ऑटो रिक्शा चलाकर 200 रुपए की कमाई भी मुश्किल से करने वाले राहुल जाधव की जिंदगी आज बिल्कुल बदल गई है। पिछले एक दशक में उनकी जिंदगी में सबकुछ बदल गया। चूंकि अब वो ऑटो रिक्शा ड्राइवर नहीं रहे। बीते शनिवार (4 जुलाई, 2018) को 36 साल के जाधव PCMC मुख्यालय पहुंचे और कुछ घंटे बाद उन्हें औद्योगिक शहर पिंपरी-चिंचवाड़ का मेयर घोषित कर दिया गया। 10वीं क्लास तक भी पढ़ाई पूरी ना करने वाले वाले जाधव ने इस दौरान नम आखों से कहा, ‘मैं साधारण लोगों का दर्द समझता हूं। खासकर ऑटो रिक्शा ड्राइवरों का। मैं अपने मेयर कार्यक्रम में गरीबों के उत्थान के लिए कार्य करुंगा।’

जाधव ने साल 1997 से 2002 तक छह सीटों पर ऑटो रिक्शा चलाया। 2002 में ऑटो रिक्शा की नौकरी छोड़ी तो खेती के क्षेत्र में आ गए। हालांकि कुछ दिनों बाद ही उन्होंने खेती का काम यह कहकर छोड़ दिया कि इसमें अब लाभ नहीं रहा और निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने लगे। इस दौरान राज ठाकरे के भाषणों से प्रभावित होकर जाधव महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) में शामिल हो गए। किस्मत ने भी उनका खूब साथ दिया। 2012 में MNS के टिकट पर चुनाव लड़ा तो PCMS सदस्य बन गए। 2017 में निकाय चुनाव से ठीक पहले जाधव ने भाजपा का दामन थाम लिया और जाधववाड़ी इलाके से तीन हजार से अधिक वोटों से विरोधी उम्मीदवार को हरा दिया।

इसी दौरान, पिछली परंपरा से तोड़कर जहां मेयर को सर्वसम्मति से चुना जाता था, PCMS को इस पद के लिए चुनाव कराना पड़ा क्योंकि एनसीपी ने अपना नामांकन वापस लेने से इनकार कर दिया था। हालांकि संख्याएं भी इसके खिलाफ थीं। मेयर पद के लिए मतदान हुआ तो जाधव को 80 वोट मिले। ये एनसीपी उम्मीदवार विनोद नाधे से 33 ज्यादा थे। इस दौरान भाजपा के तीन और एनसीपी के तीन पार्षद नदारद रहे। पांच निर्दलीय पार्षदों ने जाधव के पक्ष में वोट डाले। शिवसेना उम्मीदवार ने वोटिंग से दूरी बनाए रखी। जाधव, जिन्हें विधायक महेश लांडगे का करीबी माना जाता है, एक साल के लिए चुन लिए गए।

गौरतलब है कि मेयर का यह पद ओबीसी उम्मीदवार के लिए आरक्षित है। वहीं डिप्टी मेयर चुनाव में भाजपा के सचिन चिंचवाड़े को 79 वोट मिले। उन्होंने एनसीपी उम्मीदवार विनय को हयाया। विनय को महज 32 वोट मिले। चिंचवाड़े 2017 में चुनाव जीते थे। खास बात यह है कि वो पहले ही बार चुनाव जीते और इतना बड़ा पद हासिल कर लिया।

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