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प्रणब मुखर्जी के बाद रतन टाटा भी संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ साझा करेंगे मंच

संस्थान के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "चूंकि हमलोग टाटा हॉस्पिटल से जुड़े हुए हैं और आरएसएस से प्रेरणा लेते हैं, हम लोगों ने सोचा कि इस कार्यक्रम के लिए रतन टाटा और मोहन भागवत को बुलाया जाए।"

उद्योगपति रतन टाटा

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बाद टाटा ग्रुप के एक्स बॉस रतन टाटा भी संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच साझा करेंगे। आरएसएस से जुड़ी एक संस्था मुंबई में अगले महीने एक कार्यक्रम आयोजित कर रही है, इस कार्यक्रम में रतन टाटा शिरकत करेंगे। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक नाना पालकर स्मृति समिति (एनपीएसएस) नाम की एक संस्था मरीजों के कल्याण के लिए काम करती है। इस संस्था का नाम संघ प्रचारक नाना पालकर के नाम पर रखा गया है। ये संस्था मरीजों की सेवा करती है। मुंबई में टाटा कैंसर हॉस्पिटल के नजदीक एनपीएसएस का 10 मंजिला परिसर है। ये संस्थान इस अस्पताल के मरीजों की सेवा करता आया है।

संस्थान के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “चूंकि हमलोग टाटा हॉस्पिटल से जुड़े हुए हैं और आरएसएस से प्रेरणा लेते हैं, हम लोगों ने सोचा कि इस कार्यक्रम के लिए रतन टाटा और मोहन भागवत को बुलाया जाए।” पदाधिकारी ने कहा कि हमलोग रतन टाटा से पहले से ही जुड़े हुए हैं, उन्होंने कुछ साल पहले हमारे परिसर का दौरा किया था। इसलिए हमलोगों ने एनपीएसएस के गोल्डन जुबली समापन समारोह में उन्हें बुलाने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा जल्द होगी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक 24 अगस्त को इस कार्यक्रम के होने की उम्मीद है।

बता दें कि उद्योगपति रतन टाटा पहले भी संघ मुख्यालय आ चुके हैं। दो साल पहले वो अपने जन्मदिन पर संघ मुख्यालय आए थे। उस दौरान उनके साथ संघ मुख्यालय आने वाली बीजेपी नेता साइना एनसी ने कहा कि उस वक्त रतना टाटा ने नागपुर मुख्यालय में 2.5 घंटे गुजारे थे और आरएसएस के कार्यक्रम को गहराई से समझा था। उन्होंने बताया कि टाटा ट्रस्ट ने बाद में आधुनिक कैंसर अस्पताल की स्थापना में संघ की मदद की थी। इस अस्पताल की स्थापना नागपुर में की गई थी। पिछले साल इस अस्पताल के पहले फेज का उद्घाटन किया गया था। बता दें कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत करने पर कांग्रेस नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। आरएसएस के कार्यक्रम में प्रणब ने कहा था कि देश की बहुलतावादी संस्कृति की हर हाल में रक्षा होनी चाहिए।

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