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मालेगांव ब्लास्ट: साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित सात के खिलाफ आरोप तय, दो नवंबर को अगली सुनवाई

खुद के खिलाफ आरोप तय होने पर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने इसे कांग्रेस की साजिश बताया है।

नेशनल इंवेस्टिगेटिंग एजेंसी (NIA) के स्पेशल कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने साल 2008 के मालेगांव धमाके में खुद को आरोपों से मुक्त किए जाने की अपील की थी। कोर्ट पुरोहित की याचिका को खारिज करने के साथ ही कहा है कि इस मामले में सभी सातों अभियुक्तों साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ठाकुर, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विदेदी और सुधाकर चतुर्वेदी पर आतंकी साजिश रचने, हत्या और अन्य मामले में आरोप तय हो गए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।

खुद के खिलाफ आरोप तय होने पर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि एनआईए ने उन्हें पहले खुद क्लीन चिट दी और अब आरोप तय कर दिए। प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मुझे क्लीन चिट दी। अब मेरे खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। यह कांग्रेस की साजिश है। मगर भरोसे के साथ कह सकती हूं कि मैं निर्दोष बाहर आऊंगी। सच्चाई की हमेशा जीत होती है।’

बता दें कि सातों के खिलाफ ये आरोप एनआईए अदालत के जज विनोद पढ़ालकर ने तय किए। गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत आरोपियों पर आतंकवादी कृत्य का हिस्सा रहने और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश और हत्या के आरोप तय किए गए। आरोप तय करना एक प्रक्रिया होती है जिसके बाद आपराधिक मामले में मुकदमा शुरू होता है।

जज ने जब आरोपियों के खिलाफ आरोप पढ़े उस वक्त सभी आरोपी अदालत में मौजूद थे। मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल में लगाए गए बम में विस्फोट किया गया जिसमें छह लोगों की मौत हो गई जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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