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मुंबई: चिप्‍स के पैकेट में मिले खिलौने से घुट गया चार साल के बच्‍चे का दम, मौत

फॉरेन्सिक एक्सपर्ट ने मामले की जांच कर बताया कि खिलौना चार साल के पीयूष कुशवाहा की सांस की नली में अटक गया था, जिससे वह सांस नहीं ले सका और नतीजतन उसकी मौत हो गई।
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

मुंबई के कांदिबली इलाके में चार साल के एक बच्चे की मौत चिप्स के पैकेट में खिलौने को निगल जाने से हो गई। शनिवार (30 सितंबर) की रात को जब बच्चे ने गलती से चिप्स के साथ किलौने को भी निगल लिया तो वह उसके गले में जाकर अटक गया लेकिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की वजह से ट्रैफिक जाम में वो फंस गए और समय पर डॉक्टर के पास नहीं पहुंच सके। इससे बच्चे की मौत हो गई। एचटी मीडिया के मुताबिक फॉरेन्सिक एक्सपर्ट ने मामले की जांच कर बताया कि खिलौना चार साल के पीयूष कुशवाहा की सांस की नली में अटक गया था, जिससे वह सांस नहीं ले सका और नतीजतन उसकी मौत हो गई।

पीयूष के पिता बिरजू ने बताया कि उनका बेटा दिसंबर में पांच साल का होनेवाला था। बिरजू ने बताया कि पीयूष बहुत खुश था क्योंकि हमलोग उसे नजदीकी पूजा पंडाल और मेला घुमाकर लाए थे। शनिवार को मेले से लौटते हुए पीयूष ने एक चिप्स का पैकेट खरीदा था। बिरजू ने यह आरोप भी लगाया कि अस्पताल में 10 मिनट तक उसे डॉक्टरों ने नहीं देखा था।

बिरजू ने बताया कि वह स्प्रिंग टॉय था जो पीयूष के गले में जा अटका। खिलौना अटकते ही पीयूष बोलने में लाचार हो गया। पांच मिनट तक हमने कोशिश की कि वह खांसे ताकि खिलौना बाहर निकल जाए लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद हमलोग नजदीकी नर्सिंग होम पहुंचे। उसने बताया कि दुर्गा विसर्जन की वजह से ट्रैफिक जाम था और हमें जल्दी ऑटो रिक्शा नहीं मिल सका। इसके बाद उसे बाहों में लेकर तीन किलोमीटर दूर नर्सिंग होम के लिए दौड़ पड़ा। इसमें 20 मिनट लग गए। वहां डॉक्टरों ने चेक कर उसे संजीवनी हॉस्पिटल रेफर कर दिया। वहां पहुंचे तो डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा सांस नहीं ले पा रहा है, उसे शताब्दी अस्पताल ले जाइए। उम्मीद कम है।

शताब्दी हॉस्पिटल के डॉक्टर ने कहा कि हमलोग ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि पीयूष की सांस की नली पूरी तरह से बंद हो गई है। डॉक्टर के मुताबिक ऐसे केस में या तो सांस की नली आंशिक रूप से बंद होती है या पूरी तरह। आंशिक रूप से बंद होने पर कुछ गुंजाइश रहती है लेकिन पूरी तरह बंद होने पर तुरंत 5 से 10 मिनट के अंदर मेडिकल सुविधा देनी होती है। अब देर हो चुकी है, बच्चे की मौत हो चुकी है।

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