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महाराष्‍ट्र: वर्जिनिटी टेस्‍ट के विरोध पर महिला को डांडिया नहीं खेलने दिया, एफआईआर दर्ज

एश्वर्या ने बताया कि म्यूजिक तभी शुरू किया गया जब मैंने पंडाल छोड़ दिया। इसका एक सीधा संदेश था कि मेरे ही समुदाय ने मेरा बहिष्कार कर रखा है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतिकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में एक शादीशुदा महिला को महज इसलिए डांडिया और अन्य त्योहारों में भाग नहीं लेने दिया गया क्योंकि उसने अपने समुदाय में प्रचलित कुप्रथा ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ का विरोध किया था। घटना सोमवार (15 अक्टूबर, 2018) की है जब एश्वर्या विवेक तमाईचिकर (23) को उनके ही समुदाय के प्रभावशाली लोगों ने डांडिया में भाग नहीं लेने दिया। एश्वर्या ने अपने संग हुए इस दुर्व्यवहार के विरोध में पिंपरी पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके अलावा उन्होंने कसम खाते हुए कहा कि समुदाय में प्रचलित इस प्रथा को खत्म किए बिना अपना अभियान खत्म नहीं करेंगी।

जानकारी के मुताबिक पुलिस ने महिला को उसके समुदाय से निकाले जाने आठ लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। बताया जाता है कि सभी जाट पंचायत के सदस्य हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। यहां बता दें कि महिला के समुदाय में पति-पत्नी की सुहागरात के अगली सुबह ‘दुल्हन की कौमार्य’ का सबूत देना पड़ता है। पिछले साल दिसंबर और इस साल के जनवरी में एश्वर्या और उनके पति विवेक इस प्रथा के विरोध में उतर आए। ये अभियान धीरे-धीरे और दूसरे लोगों तक पहुंचा और उन्होंने भी इसका समर्थन किया। खासतौर युवाओं इस अभियान का खूब समर्थन किया।

हालांकि तब रूढ़िवादी प्रथा के समर्थन में समुदाय के बुजुर्ग लोग आ गए। इस साल मई में पंचायत ने अपने एक फरमान में एश्वर्या का बहिष्कार कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि अपने विवाह के अगली दिन उन्होंने बेडशीट दिखाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद जब वह जून एक विवाह समारोह में शामिल होने पहुंची तो समुदाय के कुछ लोगों ने उनपर हमला किया। एश्वर्या ने एफआईआर दर्ज कराई, हालांकि जिन सात लोगों को गिरफ्तार किया गया, उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।

अभी खरेदी में रह रहीं एश्वर्या ने बताया, ‘स्थानीय मंडल द्वारा आयोजित डांडिया में भाग लेने के लिए मैं सोमवार शाम को पिंपरी पहुंची थी। इस आयोजन पर जाट पंचायत का खासा प्रभुत्व हैं। वहां मैंने डांडिया खेलना शुरू किया तो कुछ मिनट बाद ही म्यूजिक बंद कर दिया गया। इस दौरान मां भागती हुई आईं और वहां से जाने को कहा, लेकिन मैं पंडाल में बैठी रही। म्यूजिक शुरू नहीं किया गया। इसके बाद एक वरिष्ठ सदस्य ने ऐलान कर दिया कि म्यूजिक तभी शुरू होगा जब पंडाल में मौजूद कुछ लोग चले जाएंगे। पंडाल में तब करीब चार सौ लोग मौजूद थे लेकिन कोई मेरे समर्थन में नहीं आया।’

एश्वर्या ने बताया कि म्यूजिक तभी शुरू किया गया जब मैंने पंडाल छोड़ दिया। इसका एक सीधा संदेश था कि मेरे ही समुदाय ने मेरा बहिष्कार कर रखा है। हालंकि अभी मुझे 20-30 लोगों का ही समर्थन मिला है लेकिन उम्मीद है जल्द ही पढ़े-लिखे लोग भी समर्थन में आएंगे। हमारा संघर्ष पिछले साल दिसंबर में शुरू हुआ था, जो अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। दूसरी तरफ पिंपरी डिविजन के एसीपी ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपियों की धड़पकड़ के लिए अभियान चलाया गया है।

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